बलरामपुर। 311 मीट्रिक टन गेहूं गबन के मामले ने जिले के माथे पर घपले का एक और कलंक लगा दिया है। जिले में लक्ष्य से 123.47 प्रतिशत अधिक गेहूं खरीद होने से जहां जिला प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा था, वहीं सचिवों के खेल ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला उजागर होने के बाद पीसीएफ की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में है।
जिले में 17 मार्च से 56 क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद शुरू हुई थी। 17,500 मीट्रिक टन गेहूं खरीदने के लिए चार क्रय एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इनमें खाद्य विभाग के 14, पीसीएफ के 24, यूपीएसएस के 17 और भारतीय खाद्य निगम का एक क्रय केंद्र शामिल था। 15 जून तक सभी क्रय केंद्रों पर 21,607.11 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी, जो निर्धारित लक्ष्य का 123.47 प्रतिशत था।
यूपीएसएस और खाद्य विभाग के क्रय केंद्रों से खरीदे गए गेहूं का शत-प्रतिशत संप्रदान गोदामों में कर दिया गया था, लेकिन पीसीएफ के तीन क्रय केंद्रों से गेहूं नहीं भेजा जा रहा था। कई बार पूछताछ के बाद भी गेहूं गोदामों तक नहीं पहुंचने पर अधिकारियों ने जांच शुरू की। जांच में करीब 81 लाख रुपये कीमत के 311 मीट्रिक टन गेहूं के गबन का मामला सामने आया।
पीसीएफ केंद्रों पर लक्ष्य से 149.37 प्रतिशत हुई खरीद
पीसीएफ ने जिले में 24 क्रय केंद्र बनाए थे। इन केंद्रों पर 6,300 मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। निर्धारित अवधि तक इन केंद्रों पर 9,410.15 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई, जो लक्ष्य का 149.37 प्रतिशत थी।
अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल
जिले में 15 जून को गेहूं खरीद की प्रक्रिया पूरी हो गई थी। इसके बाद क्रय केंद्रों से गेहूं गोदामों तक भेजा जा रहा था। कौवापुर, भगवानपुर खादर और नचौरा-नचौरी क्रय केंद्रों से बड़ी मात्रा में गेहूं गोदामों तक क्यों नहीं भेजा गया, इसकी समय रहते जांच नहीं की गई। यदि जुलाई-अगस्त में अधिकारियों ने इस मामले की गंभीरता से जांच की होती तो शायद गबन का मामला सामने आने में इतनी देर नहीं होती।
सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीदे गए गेहूं को नेपाल भेजे जाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में कुछ और खुलासे होने की उम्मीद है।
होगी विभागीय कार्रवाई
सरकारी गेहूं के गबन के मामले में सचिव और केंद्र प्रभारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। उच्चाधिकारियों के निर्देश के अनुसार मामले में विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
गोविंद कुमार उपाध्याय, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी