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Balrampur News: छीटजोत गांव पर मंडरा रहा कटान का खतरा

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बलरामपुर के छीटजोत गांव के पास भरा बाढ़ का पानी।-फाइल फोटो
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गैड़ास बुजुर्ग/बलरामपुर। राप्ती नदी के कटान का खतरा गैड़ास बुजुर्ग ब्लाॅक के छीटजोत गांव पर मंडरा रहा है। राप्ती नदी के मुहाने पर गांव पहुंच चुका है। बरसात से पहले कटानरोधी कार्य न होने पर गांव में नदी में समाहित हो सकता है। कटान से दो भागों में किसानों के खेत बंट गए हैं। नाव के सहारे नदी पार करके किसानों को खेती करने की मजबूरी बन गई है।
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राप्ती नदी की बाढ़ व कटान का कहर सबसे अधिक उतरौला तहसील के लोगों को भुगतना पड़ता है। इसमें गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक के अधिक गांव शामिल हैं। ग्रामीण राम उजागर बताते हैं कि उनका गांव छीटजोत राप्ती की कटान से कई वर्ष से प्रभावित है। हर वर्ष गांव के लोगों को राप्ती नदी के बाढ़ व कटान की समस्या झेलनी पड़ती है। गांव हर साल बाढ़ व कटान आपदा की चपेट में आता है। राप्ती नदी की धारा गांव की तरफ तेजी से बढ़ती जा रही है। नदी के कटान का डर ग्रामीणों को सता रहा है। गांव के किसान केवल रबी की फसल पर निर्भर हैं। खरीफ की फसल बाढ़ के कारण हर वर्ष चौपट हो जाती है। वहीं नदी में कटान होने से किसानों के खेत भी समाहित हो गए हैं, जिससे लोगों को अपना परिवार पालने के लिए दूसरे शहरों में जाकर मजदूरी करनी पड़ती है। (संवाद)

कटान से प्रभावित किसान



राप्ती नदी के कटान में गांव के हिमायतुल्लाह की 10 बीघे, बकरीदी की पांच बीघे, इश्तियाक की पांच बीघे, मतीन खान की 10 बीघे, बब्लू की 10 बीघे, गनेश की पांच बीघे, राम उजागर की 10 बीघे, संतराम की पांच बीघे और देवी प्रसाद की 10 बीघे जमीन नदी में समाहित हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि कई वर्षों से कटानरोधी कार्य कराने के लिए प्रशासन से मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
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बजट का प्रस्ताव तैयार कराने का निर्देश

छीटजोत गांव के पास राप्ती नदी के किनारे कटानरोधी कार्य कराने के लिए बाढ़ खंड को प्रस्ताव तैयार कराने का निर्देश जारी कर दिया गया है। जैसे ही शासन से बजट स्वीकृत होगा, कटानरोधी कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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- राजेंद्र बहादुर, एसडीएम उतरौला
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