फोटो-4-बलरामपुर के एसपी कार्यालय में मौजूद पकड़े गए आरोपी ।-संवाद
बलरामपुर। चांदी कारोबारियों से सुनियोजित तरीके से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। तीन शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 11 लाख रुपये कीमत की 4 किलो 435 ग्राम वजन की चांदी की पायल, 3.50 लाख रुपये नकद और चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
मामला 10 मार्च का है, जब आगरा निवासी कारोबारी पवन कुमार राठौर ने नगर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि कुछ लोगों ने जीएसटी अंकित फर्जी विजिटिंग कार्ड देकर चांदी का ऑर्डर लिया और असली माल हासिल करने के बाद गिलट (नकली) चांदी वापस कर दी। इतना ही नहीं, माल की शुद्धता का फर्जी प्रमाण पत्र भी दे दिया गया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद सर्विलांस टीम लगाकर जांच तेज कर दी गई। अपर पुलिस अधीक्षक विशाल पांडेय व क्षेत्राधिकारी नगर ज्योति श्री के साथ प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार सिंह की टीम ने छानबीन शुरू की। पता चला कि गोंडा रेलवे स्टेशन के पास से तीनों आरोपी मौजूद हैं। टीम ने मंगलवार की सुबह घेराबंदी कर तीनों को को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों में रवि कुमार वर्मा, आकाश अग्रहरी उर्फ शानू और लकी दुबे उर्फ प्रदुम्न शामिल हैं, जो गोरखपुर के निवासी हैं। एसपी ने बताया कि गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। फर्जी सिम कार्ड के जरिए कारोबारियों से संपर्क कर विश्वास जीतते, फिर प्रतिष्ठित फर्मों के नाम से नकली विजिटिंग कार्ड और जीएसटी नंबर का इस्तेमाल करते थे। कोरियर के माध्यम से असली चांदी मंगाकर उसी चैनल से मिलावटी या नकली माल वापस भेज देते थे। इस तरह बिना सामने आए ही लाखों की ठगी को अंजाम दिया जाता था। पुलिस अब इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने अब तक कितने मामले को अंजाम दिया है।
चार मोबाइल में छुपे हैं फर्जीवाड़े के राज
आरोपियों के पास चार मोबाइल फोन भी मिले हैं, जिसमें कई व्हाट्सएप ग्रुप भी बनें हैं। इससे वह जिलों के कारोबारियों से आरोपी संवाद करते थे। उनके बारे में जानकारी भी हासिल करते थे। इसके साथ ही फर्जीवाड़े की रणनीति तैयार करते थे। मोबाइल में इसके अलावा कई अभिलेख भी हैं, जिनकी पुलिस पड़ताल कर रही है। एसपी ने कहाकि इस मामले की हर तरह से पड़ताल की जा रही है। कई अहम जानकारी सामने आए हैं।
गोरखपुर से चल रहा था नेटवर्क
जांच में सामने आया कि गिरोह का संचालन गोरखपुर से किया जा रहा था, जबकि इसके तार अन्य जिलों और संभावित रूप से दूसरे राज्यों तक फैले हैं। तीनों गिरफ्तार आरोपी आपस में मिलकर योजना बनाते और ठगी से मिली रकम का बंटवारा करते थे। पुलिस अब इस नेटवर्क के बाकी सदस्यों और इसके विस्तार की पड़ताल में जुटी है।