फोटो-27-बलरामपुर के पेहर बाजार में आल्हा सुनाते गायक ।-संवाद
पेहर बाजार। पेहर माता मंदिर परिसर में आयोजित कजरी तीज मेले में सोमवार को पारंपरिक आल्हा गायन मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। अहिरौली से आए हाशिम, शंभू व उनकी टीम ने आल्हा-ऊदल की वीरता, शौर्य और मातृभूमि के प्रति समर्पण की गाथाओं का ऐसा सजीव गायन प्रस्तुत किया कि पूरा मंदिर परिसर देर तक वीर रस से गुंजायमान रहा।
करीब तीन दशक से मेले का प्रमुख आकर्षण आल्हा गायन को सुनने के लिए आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ढोलक और अन्य वाद्य यंत्रों की थाप पर प्रस्तुत वीर प्रसंगों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम के दौरान श्रोता देर शाम तक पूरे उत्साह के साथ आल्हा का आनंद लेते रहे।
मंदिर समिति के अध्यक्ष त्रिवेणी शर्मा और उपाध्यक्ष उमाशंकर सोनी ने बताया कि कजरी तीज मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण आयोजन बन चुका है। इस अवसर पर रामफेर, पारस, बबलू, झिन्नू वर्मा, दुलारे, दिन्नू, श्यामलाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं श्रोता मौजूद रहे।