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दुनिया में खलीफा साम्राज्य का हिमायती था यूसुफ

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बलरामपुर। करीब दो वर्ष से विस्फोटक व मौत का अन्य सामान इकट्ठा करने वाला आतंकी अबू यूसुफ कहता था कि मेरे और अल्लाह के बीच में दूसरा कोई नहीं है। ये बात यूसुफ की बुजुर्ग मां ने बताते हुए कहा कि वह आतंकी संगठन आईएस की नीतियों से प्रभावित होकर पूरी कायनात में खलीफा साम्राज्य (इस्लामिक तौर-तरीकों वाला शासन) स्थापित करने का हिमायती बन गया था। मगर मेरे बेटे का नाम श्रीराम जन्मभूमि के फैसले से जोड़ना गलत है।
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उतरौला के बढ़या भैसाही गांव निवासी अबू यूसुफ की वृद्ध मां कहकशां ने मंगलवार को कहा कि चोट लगने के बाद उसका मन परिवर्तित हो गया था। उसके गलत कामों का जब भी हम लोग विरोध करते थे तो वह कहता था कि मेरे व अल्लाह के बीच तीसरा कोई नहीं है। श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या के फैसले से उसका कोई लेनादेना नहीं था। अयोध्या पर फैसला तो अभी चंद महीने पहले आया है। उसका कहना था कि अयोध्या में मस्जिद बन भी जाएगी तो वहां नमाज पढ़ने कौन जाएगा। यूसुफ तो दो साल से अपनी धुन में मस्त होकर आतंकी साजिश की तैयारी कर रहा था।
बीते रविवार को बेटे को आतंकी साजिश का गुनहगार बताते हुए उसे माफ करने की गुहार लगाने वाले यूसुफ के पिता का सुर मंगलवार को अचानक बदल गये। उन्होंने कैमरे के सामने कहा कि मैंने अपने बेटे को आतंकी नहीं बल्कि अपराधी कहा था। बेटे ने विस्फोटक व अन्य आपत्तिजनक सामान एकत्र कर साजिश का अपराध किया है। उसे मेरी जानकारी में आज तक किसी से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है।
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पुलिस इस बात की पुष्टि उसका बैंक खाता चेक करके कर सकती है। आवास भी मैंने अपने दो बीघे पैतृक खेत बेचकर बनवाया है। घर बनाने में यूसुफ ने कोई पैसा नहीं दिया। यूसुफ का विरोध मां-बाप व पत्नी समेत उसके बच्चे भी कर रहे थे लेकिन वह अपने जुनून के आगे किसी की बात नहीं मानता था। उसकी गिरफ्तारी उसके बुरे कर्मों का फल है। हां ये जरूर है कि वह भटक गया था। मेरी गुजारिश है कि सरकार उसे सुधरने का एक मौका जरूर दे। बाकी हम लोग अल्लाह से भी उसके गुनाहों की माफी के लिए दुआ कर रहे हैं।
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