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Balrampur News: जूट उत्पादक क्षेत्रों व खनिजों की स्थिति दर्शाने में छूटा पसीना

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बलरामपुर। यूपी बोर्ड परीक्षा में बृहस्पतिवार को दोनों पालियों में इंटरमीडिएट की परीक्षाएं कराई गईं। प्रथम पाली में कृषि भौतिकी एवं जलवायु विज्ञान तथा कृषि जंतु विज्ञान विषय की परीक्षा आयोजित हुई। इस पाली में कुल 27 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 26 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए, एक छात्र अनुपस्थित रहा।
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द्वितीय पाली में भूगोल विषय की परीक्षा हुई। इस विषय में 2536 विद्यार्थी पंजीकृत थे, इनमें 2400 विद्यार्थी उपस्थित रहे, जबकि 136 ने परीक्षा छोड़ दी। यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट भूगोल परीक्षा में विद्यार्थी मुख्य रूप से मानचित्र कार्य (मैप वर्क), आंकड़ों पर आधारित प्रश्नों में उलझते नजर आए। जूट उत्पादक क्षेत्र, कृषि समस्याओं और सतत शहरी विकास से संबंधित सवालों ने छात्रों को सबसे ज्यादा परेशान किया।
शहर के एमपीपी इंटर कॉलेज से भूगोल की परीक्षा देकर निकले विद्यार्थियों ने प्रश्नपत्र को संतुलित बताया। छात्रा आरती वर्मा ने कहा कि जनसंख्या परिवर्तन के आंकड़े, जन्म-मृत्यु दर, और विकास के संकेतकों से संबंधित जटिल सवाल रहे, जिससे काफी माथापच्ची करनी पड़ी। छात्र शिवम तिवारी ने बताया कि मानचित्र कार्य काफी उलझाने वाला रहा। इसमें भारत के मानचित्र पर विशिष्ट जूट उत्पादक क्षेत्रों व खनिजों की स्थिति दर्शाने में काफी कसरत करनी पड़ी। परीक्षार्थी नेहा गुप्ता ने कहा कि मानव भूगोल से जुड़े प्रश्न थोड़े विश्लेषणात्मक थे, लेकिन तैयारी अच्छी होने से कठिनाई नहीं हुई।
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वहीं, आदित्य मिश्र ने कहा कि भारत में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और फसल उत्पादक क्षेत्रों की समस्याओं से संबंधित प्रश्न भी काफी उलझन भरे रहे। फिलहाल तैयारी होने से काफी हद तक सवाल हल कर दिए हैं। इसी तरह उतरौला के विद्यार्थी रामनरेश ने बताया कि स्मार्ट सिटी मिशन के उद्देश्य, झुग्गी-झोपड़ी की समस्या और सतत शहरी विकास के उपायों से संबंधित प्रश्न पूछे गए थे। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और अनुशासन की व्यवस्था चाक-चौबंद रही। जिला विद्यालय निरीक्षक मृदुला आनंद ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने केंद्र व्यवस्थापकों को निर्देश दिए कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
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