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जलभराव से किसानों के गन्ने की फसल तबाह

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बलरामपुर। भारी बारिश व बाढ़ के चलते जलभराव होने से किसानों की गन्ने की फसल तबाह हो गई है। नकदी फसल की बर्बादी को लेकर किसानों को चिंता सता रही है। उतरौला तहसील क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों के किसानों की किस्मत फूट गई है। दैवीय आपदा के साथ बकाया गन्ना मूल्य का अभी तक भुगतान न होने से किसानों में मायूसी छाई हुई है। क्षेत्र के किसानों ने शासन-प्रशासन से गन्ने की बर्बादी का मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
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किसान विजय कुमार मिश्र, रामनरेश व डीडीसी चंद्रपकाश पांडेय आदि ने उतरौला एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि राप्ती नदी व पहाड़ी नालों की बाढ़ का पानी डेढ़ दर्जन गांवों के किसानों के खेतों में भरा है।
नारायणपुर मझारी, चंदापुर, कुड़ऊ, पचौथा, टेढ़वा, चूचूहिया, मझारी दूल्हा, लखमा, महुआ, घाटम, बभनपुरवा, भगवतापुर, लारम, नेवसा, राजघाट सीरिया, कोडर, बाघाजोत, कटरा, फत्तेपुर, रुस्तम नगर, महरीचक, महुवाधनी, पांडेयजोत, बौड़िहार, मलमलिया, थरुवा, रसूलाबाद आदि गांवों के सैकड़ों एकड़ जमीनों में दो से ढाई फीट तक पानी महीनों से भरा है। जलभराव के चलते नकदी फसल गन्ना खेतों में तबाह हो गई है।
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अच्छी प्रजाति के गन्ने की खेतों में बोआई की गई थी। काफी पूंजी लगाकर किसानों ने नई तकनीक से अपने खेतों में गन्ने की बोआई की थी। गन्ना बर्बाद होने के चलते किसानों को भारी नुकसान होने की संभावना बढ़ गई है। गत वर्ष के गन्ना मूल्य का भी भुगतान नहीं किया गया है।
बजाज चीनी मिल इटईमैदा उतरौला तहसील के करीब 35 हजार किसानों का करोड़ों रुपये दबाए बैठी है। गन्ने की फसल की बर्बादी को लेकर क्षेत्र के किसानों ने शासन-प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। उतरौला एसडीएम अरुण कुमार गौड़ ने किसानों को आश्वासन दिया है कि उनकी समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया जाएगा।
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