बलरामपुर। सोहेलवा सेंचुुरी क्षेत्र का जलाशय इन दिनों विदेशी मेहमानों के कलरव से गुंजायमान है। अफगानिस्तान, साइबेरिया, यूरोपीय व एशियाई देशों से आए तरह-तरह के मेहमान पक्षियों की मेजबानी से पूरे सेंचुरी क्षेत्र में पर्यटकों की भीड़ जुटने लगी है।
सोलेहवा में प्रचुर मात्रा में मौजूद भोज्य पदार्थ व सुखद माहौल इन मेहमान पक्षियों को पांच हजार किलोमीटर दूर से यहां तक खींच लाता है। इनमें गेहवाला जैसी छोटी चिड़िया से लेकर साइबेरियन सारस तक सम्मिलित हैं। अब यह विदेशी मेहमान बसंत पंचमी के बाद अपने देश की वापसी उड़ान भरेंगे।
सोहेलवा सेंचुरी में इन दिनों दुर्लभ प्रजाति में आने वाले साइबेरियन क्रेन, ग्रेटर फ्लेमिंगो, रफ, ब्लैक विंग्ट स्टिल्ट, कॉमन टील, कॉमन ग्रीनशैंक, नॉर्दर्न पिनटेल, रोजी पेलिकन, गडवाल, वूड सैंडपाइपर, स्पॉटेड सैंडपाइपर, यूरेसियन विजन, ब्लैक टेल्ड गॉडविट विशेष आकर्षक का केंद्र बने हैं।
इनके साथ ही स्पॉटेड रेडशैंक, स्टार्लिग, ब्लूथ्रोट, लांग बिल्ड पिपिट, पनकौवा, पिहो, जांघिल, डबारू, नीलसर, लालसर, कामनटूथ, सीकपर, पिन्टेल, सलही, बारनकटा, खीमा व ठेकरी ने अपना डेरा जमा रखा है।
यह विदेशी मेहमान सोहेलवा सेंचुुरी क्षेत्र के भगवानपुर, चित्तौड़गढ़, मजगवां, गिरगिटही, गिधरैया, कोहरगड्डी, चांदेताल व केरावगढ़ आदि भी जलाशयों में अठखेलियां करते दिखते हैं। इन मेहमान समूह की जलक्रीड़ा जलाशयों की शोभा बढ़ाने के साथ ही पर्यटकों को भी अपनी तरफ खूब आकर्षित कर रही है।
बलरामपुर के डीएफओ प्रखर गुप्ता ने बताया कि यह विदेशी पक्षी अपने आप को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करने के कारण यहां के जलाशयों का रुख करते हैं। इसी कारण साल दर साल इन पक्षियों की आमद में बढ़ोत्तरी हो रही है। पक्षियों के शिकार पर भी पूरी तरह अंकुश लगाया जा चुका है। पक्षियों व जानवर का शिकार करते पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।