औषधि निरीक्षक ने मामले में 19 नवंबर को दो मेडिकल स्टोर संचालकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस के अनुसार श्याम फार्मा के नाम से करीब 15 हजार बोतल कोडीन युक्त सिरप की बिक्री दर्शाने वाले बिल प्रस्तुत किए गए थे। संबंधित मूल बिल, स्टॉक रजिस्टर और खरीद-बिक्री के अभिलेख मांगे गए, तो संचालक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके।
प्रभारी निरीक्षक राजकुमार सिंह ने बताया कि श्याम फार्मा ने कोडीन युक्त सिरप की बिक्री से संबंधित वैध अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए। इस कारण कार्रवाई की गई है। जांच में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ रही है। शीघ्र ही और गिरफ्तारियां संभव हैं।
एसआईटी की देखरेख में खरीद-बिक्री का सत्यापन
कस्बे के अमन मेडिकल स्टोर और अशोक मेडिकल स्टोर की ओर से 24 से अधिक व्यक्तियों के नाम पर बिक्री बिल प्रस्तुत किए गए हैं। इन बिलों की सत्यता की जांच प्रदेश स्तर पर गठित एसआईटी के देखरेख में हो रही है। थोक दवा विक्रेताओं से प्राप्त विवरण में कई व्यक्तियों को बड़ी मात्रा में कोडीन युक्त सिरप बेचने का उल्लेख है। पुलिस स्टॉक रजिस्टर, जीएसटी विवरण, ट्रांसपोर्ट रसीद और बैंक लेनदेन का भी मिलान कर रही है।
फर्जी बिलों का दावा, शपथ पत्र की तैयारी
जांच के दौरान पता चला कि कुछ दुकानदारों के नाम से फर्जी बिल बनाए गए हैं। उन्होंने इतनी बड़ी मात्रा में दवा की खरीद नहीं की है। कुछ व्यापारी पुलिस को एफिडेविट देने के लिए भी तैयार हैं। इससे अवैध नेटवर्क के संगठित होने की आशंका बढ़ गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच केवल खुदरा दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि थोक आपूर्ति शृंखला, परिवहन माध्यम और ऑनलाइन भुगतान भी खंगाला जा रहा है।