बलरामपुर। दुनिया की 51 शक्तिपीठों में शुमार देवीपाटन शक्तिपीठ व नेपाल सीमा पर स्थित सोहेलवा सेंक्चुरी की खूबसूरती अब देश विदेश के पर्यटन मानचित्र पर चमकेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस संबंध में बुधवार को पर्यटन, वन तथा प्रशासन के अफसरों से चर्चा करेंगे। उम्मीद है कि शीघ्र ही शक्तिपीठ में देवीदर्शन के लिए आने वाले देश विदेश के श्रद्धालु अब जंगल की सैर कर पर्यटन का आनंद भी उठायेंगे।
सिरिया पहाड़ी नदी के पवित्र तट पर स्थित देवीपाटन शक्तिपीठ दुनिया में स्थापित आदि शक्ति मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठों में शुमार है। यहां देवी सती का वामस्कंध पट सहित गिरा था इसीलिए शक्तिपीठ का नाम देवीपाटन पड़ा। मान्यता यह भी है कि यहीं पर माता सीता का पाताल गमन भी हुआ था जिसका प्रमाण आज भी सुरंग के रूप में मौजूद है। यहां हर साल देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर परिसर स्थित सूर्यकुंड, गुरु गोरक्षनाथ की धूनी, गोशाला, थारू बच्चों का गुरुकुल व छात्रावास, मां पाटेश्वरी सेवाश्रम अस्पताल तथा सदियों पुराने वटवृक्ष काफी दर्शनीय हैं।
जिले की भारत-नेपाल खुली सीमा पर स्थित सोहेलवा सेंक्चुरी का कुल क्षेत्रफल करीब 452 वर्ग किमी है। इस सेंक्चुरी में जीवों व वनस्पतियों की काफी समृद्घ विविधताएं मौजूद हैं। इस वन क्षेत्र को रॉयल बंगाल टाइगर का प्राकृतवास भी माना जाता है। हिरन तथा तेंदुओं से भरा ये वन क्षेत्र पहाड़ी नदियों व नालों के कारण मनोहारी प्राकृतिक छटाओं से परिपूर्ण है। जनकपुर, रामपुर, भांभर, बनकटवा तथा बरहवा रेंज में साखू, सागौन, साल तथा काले शीशम जैसी बहुमूल्य लकड़ियों के अलावा चिरायता, सतावर, सफेद मूसली, हरड़, बहेड़ व आंवला जैसी औषधियां भी इस वन क्षेत्र में बहुतायत में पाई जाती हैं।
चित्तौड़गढ़, बघेलखंड, गिरगिटही व रेहरा आदि जलाशयों में हर साल विदेशों से तमाम पक्षी आते हैं। इन पक्षियों को देखने के लिए सर्दियों में आने वाले लोग बर्ड वाचिंग फेस्टिवल भी मनाते हैं। केरावगढ़ जलाशय को पक्षी बिहार के रूप में विकसित करने की योजना भी शासन स्तर पर लंबित हैैै। मेहमान पक्षियों का कलरव इस क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करेगा। जलाशयों के किनारे टूरिस्ट हट बनाकर पर्यटन से अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है।
डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि देवीपाटन शक्तिपीठ में बुधवार को प्रवास के दौरान सीएम शक्तिपीठ तथा सोहेलवा सेंक्चुरी में पर्यटन विकास की संभावनाओं पर अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। बैठक के बाद क्षेत्र में पर्यटन विकास की योजनाओं का प्रारूप तैयार कर अमल किया जाएगा।