बलरामपुर। कोविड-19 महामारी के चलते सात माह बाद स्कूल खुल गए हैं लेकिन बच्चों की उपस्थित बेहद कम रही है। दोनों पालियों में पहले दिन हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के करीब 25 प्रतिशत छात्र उपस्थित हुए। कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए नौवीं से 12वीं तक की कक्षाएं शुरू कर दी गई हैं। सभी स्कूलों में प्रधानाचार्यों की तरफ से गोले बनवाए गए और कक्षाओं में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठने के इंतजाम किए गए।
कोविड 19 महामारी के सभी सुरक्षा नियमों का पालन किया जाएगा। शारदा पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य संदीप सिंह ने बताया कि सबसे पहले गेट पर ही बच्चों को सैनिटाइजर दिया गया और उन्हें मास्क लगाने की सख्त हिदायत दी गई। कक्षाओं में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठाया गया। पहले दिन दोनों पालियों में करीब 25 प्रतिशत छात्र उपस्थित हुए जबकि नियमों के अनुसार 50 प्रतिशत तक बच्चे बुलाए जा सकते हैं।
पायनियर पब्लिक स्कूल के निदेशक डॉ. एमपी तिवारी ने बताया कि सात माह बाद स्कूल खुलने पर बच्चों ने खुशी जताई है। बच्चों की सुरक्षा के लिए विद्यालय में साफ-सफाई की व्यवस्था की गई। ऑटोमेटिक सैनिटाइजर फॉग मशीन, ऑक्सीमीटर व स्प्रे मशीन की व्यवस्था की गई है। दोनों पालियों में 25 से 30 प्रतिशत बच्चे उपस्थित हुए।
एमपीपी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य कैप्टन जीपी तिवारी ने बताया कि कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए बच्चों व स्टॉफ के बीच सामाजिक दूरी का पालन कराया गया। पहले दिन 50 प्रतिशत बच्चों को बुलाया गया। दूसरे दिन 50 प्रतिशत बच्चे बुलाए गए हैं। कोरोना महामारी के डर से अभी बच्चे स्कूल आने से कतरा रहे हैं, इसलिए पहले दिन 20-25 प्रतिशत छात्र ही आए।
माध्यमिक शिक्षा विभाग बलरामपुर की नोडल अधिकारी सीमा शुक्ला ने सोमवार को जिले के 12 स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई स्कूलों में खामियां पाई गईं जिस पर नोडल अधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई। डीआईओएस डॉ. चंदन पांडेय को ऐसे प्रधानाचार्यों से जवाब तलब करने का निर्देश नोडल अधिकारी ने दिया है।