बलरामपुर। परियोजना सरयू नहर न केवल हर खेत को पानी पहुंचाने का काम करेगी बल्कि इस परियोजना से पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी बाजपेई की नदी जोड़ो सपना भी पूरा हो रहा है। नदी जोड़ने का सपना अटल जी ने इसलिए देखा था इससे न केवल हर नदियों में वर्ष भर पानी रहेगा बल्कि इसके माध्यम से बाढ़ जैसी दैवीय आपदा का बेहतर प्रबंधन भी होगा।
प्रदेश के जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने मंगलवार को प्रधानमंत्री कार्यक्रम स्थल का जायजा लेते हुए बताया कि भगवान बुद्ध, अटल जी तथा नानाजी देशमुख की धरती से 11 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदेश-देश ही नही बल्कि पूरी दुनिया को बड़ा संदेश देंगे।
किसानों की आय दोगुनी करने तथा हर खेत को पानी पहुंचाने के प्रति भाजपा सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सरयू नहर परियोजना जो कि वर्ष 1971-72 में शुरू हुई थी और यह परियोजना तराई के लिए वरदान बनने वाली थी लेकिन तमाम पूर्ववर्ती सरकारों की लापरवाही के कारण परियोजना पूर्ण नहीं हो सकी।
वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना को पूरा करने का बीड़ा उठाया और अब मात्र सात वर्षों में यह परियोजना 11 दिसंबर को किसानों को समर्पित कर देंगे। इस नहर की कुल लंबाई 318 किमी है। कुल 9 जिलों की 14.5 लाख हेक्टेअर भूमि सिंचित होगी करीब 25 से 30 लाख किसानों को इसका फायदा मिलेगा।
लिंक नहरों की कुल लंबाई 6600 किमी होगी। इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ तराई क्षेत्र की पांच नदियों को आपस में जोड़ने से होगा। इस नहर से घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा तथा रोहिणी नदी जुड़ेगी। इन नदियों के जुड़ने से न केवल इस नहर में सिंचाई के लिए वर्ष भर पानी उपलब्ध होगा बल्कि इससे बाढ़ आदि की विभीषिका को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।