बलरामपुर। मनरेगा योजना के तहत भले ही श्रमिकों को किसी तरह गांवों में ही रोजगार मिल जा रहा है, लेकिन मजदूरी के लिए उनको भटकना भी पड़ रहा है। 28 हजार मनरेगा श्रमिकों की चार माह से 36 करोड़ रुपये की मजदूरी बकाया है। विभागीय अधिकारी श्रमिकों को मजदूरी देने में लापरवाही बरत रहे हैं। इससे श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
स्कूलों चारदीवारी, अमृत सरोवर, खेल मैदान आदि के निर्माण को लेकर विभाग का काफी जोर है। लेकिन श्रमिकों को मजदूरी न मिलने से निर्माण कार्य में बाधा भी पहुंच रही है। मजदूरी न मिलने से श्रमिकों में आक्रोश है, इससे प्रधानों पर भी काफी दबाव बढ़ गया है। जिले में मनरेगा कार्डधारकों की संख्या 1,77, 421 हैं। इनमें से 1,34, 283 कार्डधारक सक्रिय हैं।
समय पर मजदूरी दिलाने के लिए सक्रिय कार्डधारकों के आधार कार्ड की फीडिंग कर दी गई। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, चार माह से करीब 28 हजार मनरेगा श्रमिकों के खाते में 36 करोड़ रुपये मजदूरी का पैसा नहीं आया है। आए दिन श्रमिक मजदूरी के लिए प्रधानों का चक्कर लगा रहे हैं। उधर, प्रधान बकाये भुगतान के लिए विकास खंड कार्यालय जिला मुख्यालय का चक्कर काट रहे हैं।
घर चलाना हुआ मुश्किल
हरैया सतघरवा विकास खंड के मनरेगा श्रमिक बनकटवा खुर्द पतझी निवासी मनीष, चेतराम, गफूर व मनोज सहित अन्य ने बताया कि चार माह से मजदूरी नहीं मिली है। इससे घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कहा, जिम्मेदारों को हम मजदूरों पर ध्यान देना चाहिए। ग्राम पंचायतों में गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराने व शहरों की ओर से हो रहे पलायन को रोकने के लिए मनरेगा एक बड़ा माध्यम है। कोविड काल के दौरान लगे लाॅकडाउन में बड़े पैमाने पर बाहर से आए बेरोजगारों को मनरेगा ने रोजगार देकर सहारा दिया था।
बीते करीब चार माह से मनरेगा श्रमिकों की करीब 36 करोड़ रुपये मजदूरी का भुगतान बाधित है। प्रयास किया जा रहा है कि जल्द ही सभी का भुगतान हो जाए। मनरेगा श्रमिकों को किसी तरह से दिक्कतें न हो इसका विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- कमलेश कुमार सोनी, डीसी मनरेगा बलरामपुर