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Balrampur News: सीमा से दूर बन रहे अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार के निर्माण पर रार

Thu, 28 Sep 2023 11:08 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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बलरामपुर के जरवा में ​स्थित अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर बना नेपाल देश का स्वागत व प्रवेश द्वार।
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जरवा (बलरामपुर)। भारत–नेपाल के अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बनने वाला स्वागत और प्रवेश द्वार को सीमा से छह किमी अंदर भारत में बनाए जाने से ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। उनके विरोध को देखते हुए बृहस्पतिवार को पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने निर्माण कार्य रोक दिया है। सीमा से पहले ही जरवा के टंडवा गांव में इसका निर्माण कराया जा रहा है। इससे देश की छह किमी जगह बेवजह छूट रही है। इसके पीछे वन विभाग की आपत्ति बताई जा रही है। वहीं, ग्रामीणों का कहना है देश की सीमा पर ही निर्माण हो, नहीं तो बाद में सीमा को लेकर नेपाल से विवाद की गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
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ग्राम जरवा, जरवा बाजार, रानी तालाब के लोगों ने निर्माण कार्य का विरोध करते हुए कहा कि जहां सभी देश विस्तारवादी बनते जा रहे हैं वहीं, यहां तो स्वयं की जमीन को नेपाल सीमा के निकट छोड़ जा रहा है। हीरालाल यादव ने कहा कि मेरा गांव सीमा से टंडवा के बीच में है। भविष्य में हमें अपनी नागरिकता को लेकर बड़ी चिंता सता रही है। सभी सीमा पर भारत और नेपाल का प्रवेश द्वार आमने-सामने बना हुआ है। लेकिन जरवा में ऐसा नहीं किया जा रहा।
छात्र विजय यादव ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि प्रवेश व स्वागत द्वार सीमा पर ही होना चाहिए। भारत में इसे छह किलोमीटर अंदर बनाना अशोभनीय है। पूर्व प्रधान राघवराम थारू ने कहा कि स्वागत द्वार भारत में छह किलोमीटर अंदर बनने पर वन माफिया और अवैध कारोबार करने वालों के लिए कई रास्ते खुल जाएंगे। व्यापारी अरुण साहू, बालापुर प्रधान हरीश मिश्रा, विशंभर यादव जुमाई, हजरत इदरीस, छात्र विजय यादव सहित दर्जनों लोगों ने जरवा के टंडवा में स्वागत द्वारा बनने का विरोध किया है। जिलाधिकारी से स्वागत द्वार को सीमा पर ही बनवाने का अनुरोध किया है।
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आपत्ति दूर होने पर ही हो सकेगा निर्माण

ग्रामीणों के विरोध व अधिकारियों के निर्देश पर अंतरराष्ट्रीय प्रवेश व स्वागत द्वार के कार्य को अग्रिम आदेश तक बंद कर दिया गया है। द्वार की बुनियाद बनाने का कार्य चल रहा था। यदि वन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र मिल जाता है तो स्वागत व प्रवेश द्वार सीमा पर ही बनेगा। नहीं तो टंडवा में चल रहे कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। सीमा द्वार से कोई सीमा नहीं तय होनी है, छूट रही जमीन पहले से ही वन विभाग के अधीन है।
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- राकेश माल, एई, प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग
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