बलरामपुर। बीते दिन नेपाल में हुई भारी बारिश के चलते बुधवार को जिले में राप्ती नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 16 सेमी ऊपर पहंच गया है। अक्तूबर माह में बाढ़ की आशंका से अन्नदाताओं की चिंता बढ़ गई है। पहले बारिश और अब बाढ़ से धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
खेतों में 80 फीसद धान की फसल तैयार खड़ी है। किसान फसल की कटाई कर रहे थे कि इसी बीच बीते तीन दिनों से आए चक्रवाती तूफान व भारी बारिश ने किसानों की कमर पहले ही तोड़ दी है। अब बुधवार को तेजी से बढ़ रहा राप्ती नदी का जलस्तर निचले व तटवर्ती गांवों में कहर ढा सकता है।
शाम पांच बजे नदी का जलस्तर चेतावनी बिन्दु 103.780 मीटर से 16 सेमी ऊपर 103.780 मीटर पर पहुंच गया है। नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी है। यही नहीं राप्ती ने पड़ोसी जनपद श्रावस्ती में बाढ़ का कहर बरपाना भी शुरू कर दिया है। ऐसे में निचले तथा नदी के तटवर्ती गांव के किसान चिंतित हो गए हैं।
किसान अशफाक, श्रीनिवास, राम कुमार, चिनके व इलियास आदि ने बताया कि यदि बाढ़ आई तो धान की तैयार खड़ी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। इस संबंध में एडीएम राम अभिलाष ने बताया कि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा व बचाव के सारे इंतजाम किए जा रहे हैं।
खरझार पहाड़ी नाले में बुधवार को आई बाढ़ से कई गांव जलमग्न हो गए। कई गांव के रास्ते पर बाढ़ का पानी आ जाने से आवागमन भी प्रभावित हुआ है। कई हेक्टेअर धान की फसल में बाढ़ का पानी घुस जाने से बालू पट गया है।
खरझार पहाड़ी नाले में आई बाढ़ के चलते रामगढ़ मैटहवा, शांतिपुरवा, सहबिनिया, रामस्वरूपपुरवा, बरगदही, पटोहाकोट, बुडंतपुर, पूरेछीनटन, अमरहवा, सुगानगर, जगरामपुरवा, लहेरी व विजयीडीह सहित करीब एक दर्जन गांव जलमग्न हो गए। कई गांव के संपर्क मार्ग पर बाढ़ का पानी आ जाने से आवागमन भी प्रभावित हो गया।
सैकड़ों हेक्टेअर धान व गन्ने की फसल में बाढ़ का पानी घुस जाने से खेत में बालू भर गया है। फसल तबाह होने से किसान चिंतित दिख रहे हैं। इस संबंध में एसडीएम तुलसीपुर अजीत जायसवाल ने बताया कि क्षेत्रीय लेखपाल को मौक पर भेजकर जांच कराई जा रही है। फसल बर्बाद होने पर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।