बलरामपुर। राप्ती नदी का जलस्तर घटते ही कटान का कोहराम मच गया है। राप्ती नदी ने तटवर्ती इलाकों में बसे दो दर्जन गांवों के जमीनों को निगलना शुरू कर दिया है। सदर व उतरौला तहसील के गांवों में राप्ती नदी का कटान तेज हो गया है। सदर एसडीएम डॉ. नागेंद्र नाथ यादव व तहसीलदार शेख आलमगीर ने कटान प्रभावित गांवों का निरीक्षण कर पीड़ितों को हर संभव मदद मुहैया कराने का आश्वासन दिया है। कटान प्रभावित गांवों में क्षेत्रीय लेखपालों को निगरानी कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
राप्ती नदी का जलस्तर बुधवार को चेतावनी बिंदु के 103.62 मीटर की तुलना में 103.210 मीटर रहा। चेतावनी बिंदु से राप्ती नदी का जलस्तर 41.8 सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि राप्ती नदी का जलस्तर बहुत धीमी गति से बढ़ता बताया गया है। जलस्तर घटते ही राप्ती नदी में कटान का कहर तेजी से शुरू हो गया है।
सदर व उतरौला तहसीलों में राप्ती नदी के तटवर्ती इलाकों में बसे चौका कला, लालपुर फगुइया, पाठकपुरवा, गुलाम पुरवा, बेलहा, चरनगहिया, रामपुर, घोसियार, कुड़ऊ, बौड़िहार व गोनकोट सहित 24 से अधिक गांवों में कटान तेज हो गई है। लालपुर फगुइया में 12 से अधिक घर राप्ती नदी में समाहित हो चुके हैं। वहीं बेलहा गांव के पास कटान होने से नदी सड़क के किनारे पहुंच गई है। रामपुर, घोसियार व भचकहिया को बचाने वाला तटबंध भी नदी की कटान के जद में आ रहा है।
कोड़री घाट पुल के दक्षिणी सिरे पर राप्ती नदी कटान कर रही है। आसपास के लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन की तरफ से शीघ्र कोई उपाय नहीं किया गया तो कोड़री घाट पुल के गाइड बांध व पहुंच मार्ग को भी नुकसान हो सकता है। कटान प्रभावित क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि प्रशासन की तरफ से कोई उपाय न होने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों ने शासन-प्रशासन से कटान प्रभावित क्षेत्रों में उचित प्रबंध कराए जाने की मांग की है।
सदर एसडीएम ने बताया कि उन्होंने तहसीलदार के साथ कटान प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया है। मौके पर मौजूद कटान पीड़ितों से वार्ता करके नुकसान के बारे में ब्योरा जुटाया गया है। राप्ती नदी के कटान पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। लेखपालों को कटान प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। कोड़री घाट व बेलहा गांव के पास कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड के एक्सईएन को जिम्मेदारी सौंपी गई है।