बलरामपुर। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में स्वास्थ्य प्रतिपूर्ति पटल के वरिष्ठ सहायक मोहन लाल जायसवाल के गिरफ्तार होने के बाद गहमागहमी का माहौल है। कार्यालय में अब सभी वरिष्ठ सहायक के करतूतों पर ही चर्चा कर रहे हैं। वैसे वरिष्ठ सहायक की कार्यशैली पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं, जब उसने अपनी पत्नी की फाइल पर मुहर लगाकर पैसा निकलवा लिया था। वहीं विभाग के करीब 50 से अधिक कर्मियों की फाइलें लंबित रह गई थी।
सीएमओ कार्यालय में चिकित्सा प्रतिपूर्ति की 50 से अधिक फाइलें लंबित हैं। कई फार्मासिस्ट व अन्य कर्मियों की फाइलें तो दो-ढाई साल से पटल पर ही लटकी हुई है। स्वास्थ्य कर्मी सीएमओ कार्यालय का चक्कर लगाते-लगाते थक गए, लेकिन उन्हें इलाज का पैसा नहीं मिल पाया। वरिष्ठ सहायक अपनी जेब भरने के लिए चिकित्सा प्रतिपूर्ति दिलाने में भी जमकर खेल कर रहा था। मनमाने ढंग से अपनों की फाइल पास कराता था। उसकी कार्यशैली पर सवाल तब उठा था जब उसने अपनी पत्नी की फाइल को स्वीकृत कराते हुए चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए 69004 रुपये का बजट जारी करवा लिया था। इस संबंध में अमर उजाला ने 30 मार्च के अंक में चिकित्सा प्रतिपूर्ति में खेल, अपने पास पराए फेल शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। उस समय इस मामले में विभागीय अधिकारी चुप थे। अब एंटी करप्शन की कार्रवाई होने के बाद सभी सवालों के घेरे में आ गए हैं।
अलर्ट हो गए अन्य पटल बाबू
चिकित्सा प्रतिपूर्ति के पटल बाबू की गिरफ्तारी के बाद अन्य पटलों के सहायक अलर्ट हो गए हैं। अब उनके अंदर भी भ्रष्टाचार निवारण संगठन का खौफ देखने को मिल रहा है। सीएमओ कार्यालय में निजी प्रतिष्ठान पंजीकरण पटल, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र पटल, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र पटल, सेवा स्थापना सहित कई पटलों पर बहुत सारी फाइलें लंबित हैं। ऐसे में इन पटलों के बाबू अब चाह कर भी किसी से कुछ मांग नहीं करेंगे।