उतरौला। नामांतरण प्रक्रिया को ऑनलाइन किए जाने के विरोध में अधिवक्ताओं का न्यायिक बहिष्कार लगातार 12वें दिन भी जारी रहा। इसके चलते उपनिबंधक कार्यालय में बैनामा पंजीकरण का काम पूरी तरह ठप है। रजिस्ट्री बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी स्टांप वेंडरों, दस्तावेज लेखकों, फोटो कॉपी संचालकों और छोटे कारोबारियों को हो रही है। उनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
रजिस्ट्री कार्यालय में जहां सामान्य दिनों में भीड़ जुटी रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। दस्तावेज लेखक भी न्यायिक बहिष्कार के समर्थन में अपने काउंटरों से दूर हैं। स्टांप वेंडर नफीसुद्दीन ने बताया कि करीब 15 दिनों से एक भी स्टांप की बिक्री नहीं हुई। बच्चों की स्कूल फीस जमा करना तक मुश्किल हो गया है। वहीं धर्मेंद्र ने कहा कि दुकान का किराया निकालना भी कठिन हो गया है और यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आर्थिक संकट और गहरा जाएगा।
रजिस्ट्री कार्यालय के आसपास फोटो कॉपी, टाइपिंग और अन्य छोटे कारोबार करने वाले दुकानदार भी आय के अभाव में परेशान हैं। दैनिक कमाई पर निर्भर इन परिवारों के सामने घर का खर्च चलाना चुनौती बन गया है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रह्लाद यादव और महामंत्री रवि शंकर मिश्र ने आरोप लगाया कि बिना किसी शासनादेश के नामांतरण प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया वापस लेने और समस्या के समाधान तक न्यायिक बहिष्कार जारी रहेगा।