बलरामपुर। निकाय चुनाव अब धीरे-धीरे पूरे शबाब पर आ रहा है। नेता व उनके समर्थक मतदाताओं के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हैं। हर तरह से मनुहार कर रहे हैं। दरअसल, बीते चुनावों में तुलसीपुर व पचपेड़वा में निर्दलीयों को ही सफलता हाथ लगी है। ऐसे में निर्दलीयों के गढ़ को भेदने की चुनौती बरकरार है। राजनीतिक दलों की चिंता बागियों ने बढ़ा दी है। फिलहाल राजनीतिक दलों के प्रत्याशी निर्दलीयों के गढ़ में सेंधमारी में जुटे हैं। वे मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए हर जतन कर रहे हैं।
बात अगर तुलसीपुर नगर पंचायत की करें तो यहां पर वर्ष 2007 के चुनाव में निर्दलीय अशोक कुमार सोनी ने जीत हासिल की थी। वर्ष 2012 के चुनाव में निर्दल फिरोज पप्पू को जीत मिली। वर्ष 2017 के चुनाव में कहकशां फिरोज ने निर्दल प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल की थी।
महज प्राइमरी पास कहकशां को 5070 वोट मिले थे, जबकि भाजपा की शारदा देवी को 4982, सपा की निर्मला कुमारी को 939, बसपा की मैमुन्निशा को 266, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सुनीता सिंह को 78 वोट ही मिले। बीते चुनाव में मैदान में उतरे 10 प्रत्याशियों में से आठ की जमानत तक जब्त हो गई थी। इस बार के चुनाव में यहां पर अध्यक्ष पद के लिए 18 उम्मीदवार मैदान में हैं। यहां पर टिकट न मिलने से भाजपा के तीन नेता निर्दल मैदान में आ डटे हैं।
पचपेड़वा नगर पंचायत में वर्ष 2007 में निर्दल ओमप्रकाश ने नगर की बागडोर संभाली थी। वर्ष 2012 के चुनाव में निर्दल मंजूर आलम ने जीत हासिल की। 2017 के निकाय चुनाव में निर्दलीय समन मलिक ने 2350 मत पाकर जीत हासिल की थी। इस चुनाव में भाजपा की उर्मिला को 2168 मत, सपा की शाहजहां को 1970, बसपा की फातमा खान को 41 वोट ही मिले थे। इस बार यहां पर 15 उम्मीदवार मैदान में हैं। बसपा व कांग्रेस यहां पर उम्मीदवार ही नहीं उतार सकी हैै। यही नहीं, भितरघात से राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ गई है।
भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी डीपी सिंह कहते हैं कि पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ रही है। इस बार हर बूथ की प्लानिंग है। सपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष परशुराम वर्मा का कहना है कि हमारे प्रत्याशी पूरी ताकत से चुनाव लड़ रहे हैं। कहीं पर कोई समस्या नहीं है।