मध्याह्न भोजन (एमडीएम) घोटाले की जांच में पुलिस ने शुरुआती तेजी दिखाई, लेकिन पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कदम रुक गए हैं। नौ नामजद आरोपी अपने दर्ज पते पर नहीं मिले। आरोपियों के मोबाइल फोन भी बंद हैं।
अब पुलिस ने सीडीआर, बैंक लेनदेन, यात्रा रिकॉर्ड और सोशल नेटवर्क के आधार पर लोकेशन खंगालनी शुरू कर दी है। अन्य जिलों व पड़ोसी राज्यों तक जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। मामले में 30 ऐसे आरोपी बनाए गए हैं, जिनके सिर्फ नाम ही एफआईआर में दर्ज हैं। उनके बारे में पुलिस को बेसिक शिक्षा विभाग की रिपोर्ट का इंतजार है। पते की जानकारी के लिए भुगतान के बैंक खातों की पड़ताल भी हो रही है।
गिरफ्तार आरोपियों से मिली अहम जानकारी
पुलिस ने पांच आरोपियों से पूछताछ की थी, जिनसे मिली जानकारी के आधार पर अब अभिलेख जुटाए जा रहे हैं। कोशिश है कि आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत के साथ चार्जशीट दाखिल की जा सके। पूछताछ में फर्जी उपस्थिति दर्ज कराकर बिल बढ़ाना, खाद्यान्न के गलत आंकड़े दिखाना, भुगतान प्रक्रिया में गड़बड़ तरीके से धन निकासी, स्कूलों और आपूर्तिकर्ताओं के बीच मिलीभगत जैसे गंभीर बिंदुओं की पुष्टि हुई है। जांच टीम ने संबंधित रजिस्टर, बिल, स्टॉक बुक और भुगतान रिकॉर्ड भी कब्जे में लिए हैं। सभी को चार्जशीट का अहम हिस्सा बनाया जाएगा।
चार्जशीट से पहले सभी की गिरफ्तारी प्राथमिकता
पुलिस अधिकारियों के अनुसार मजबूत चार्जशीट के लिए सभी आरोपियों की गिरफ्तारी बेहद जरूरी है। शासन ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि किसी भी हाल में आरोपियों को बचने नहीं दिया जाएगा। जिला प्रशासन की ओर से यह संकेत दिया गया है कि यह मामला सरकार की प्राथमिकता सूची में है और इसे नजीर बनाकर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है।