बलरामपुर। कड़ाके की सर्दी ने शुक्रवार को भी लोगों को कंपकंपाया। धूप तो निकली लेकिन मगर बर्फीली हवा के चलते गलन बरकरार रही। ठंड के कारण बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ रहा है। शुक्रवार को जिले का अधिकतम तापमान 21 व न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
शुक्रवार की सुबह घना कोहरा छाया रहा। इससे रफ्तार पर असर पड़ा। सुबह आठ बजे तक चंद यात्रियों के ही निकलने के कारण झांसी, कानपुर और उतरौला जाने वाली तीन बसों को निरस्त करना पड़ा। गोरखपुर से आने वाली इंटरसिटी ट्रेन 20 मिनट विलंब से पहुंची, इससे लोगों को दिक्कत हुई।
संयुक्त जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन कुमार का कहना है कि मौसम का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है। सर्दी, जुकाम व बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। शुक्रवार को ओपीडी में 70 मरीज आए। इसमें से 50 मरीज मौसम जनित बीमारियों के ही रहे। ऐसे में लोगों को बच्चों की सेहत को लेकर सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सियाराम का कहना है कि शुक्रवार को जिले का अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस रहा। वर्तमान में सरसों, मटर व आलू पर पाले का असर पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को फसलों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
डीएम डॉ. महेंद्र कुमार व एसपी राजेश कुमार ने बृहस्पतिवार देर रात रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन व तुलसीपुर रोड स्थित रैन बसेरा का हाल जाना। जरूरतमंद लोगों को कंबल वितरित किया। बाद में डीएम ने जिला महिला अस्पताल पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लिया।
डीएम ने वार्ड में भीड़ मिलने पर नाराजगी जताई। स्वास्थ्यकर्मियों को चेतावनी दी कि अवैध वसूली की शिकायत मिली तो कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बस स्टेशन की सड़क के निर्माण की बात कही। इस दौरान एडीएम प्रदीप कुमार व एसडीएम सदर राजेंद्र बहादुर सहित अन्य मौजूद रहे।
मगईपुर, नरायनपुर, बनकसिया, परानपुर, बुधनजोत, इटइरामपुर खास, नगवा, दुधरा, कैथवलिया सलेमपुर व बौडीहार आदि परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को अभी तक यूनिफार्म का पैसा नहीं मिल सका है। ऐसे में ठंड में भी बिना स्वेटर व जूते-मोजे के ही बच्चे स्कूल जाने को विवश हैं। अभिभावक सुभाष चंद्र, प्रेम बहादुर, तुलाराम, राजेंद्र कुमार, धर्मेंद्र, सिराजुद्दीन, जफर व ताज ने बताया कि अभी तक पैसा नहीं आया है। अपने पास से बच्चों के लिए स्वेटर खरीद रहे हैं। खंड शिक्षा अधिकारी विनय कुमार चौधरी ने बताया कि अभिभावकों के खाते में सीधे परियोजना से पैसा भेजा जाता है।