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Balrampur News: यूरिया की किल्लत से 1.5 लाख किसान परेशान

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बलरामपुर। पहले बाढ़, फिर डीएपी व बीज संकट के बाद अब किसानों को यूरिया की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। जिले की 62 सहकारी समितियों में इस समय यूरिया नहीं है। इस पर भी समितियों के सचिव यूरिया की उठान से कन्नी काट रही हैं। इसका कारण यूरिया की उठान का किराया नहीं बढ़ना है।
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जिले के नौ ब्लॉकों में 62 सहकारी समितियां हैं। इनके माध्यम से डेढ़ लाख किसानों को यूरिया उपलब्ध कराई जाती है। जिला मुख्यालय स्थित गोदाम से समिति तक यूरिया ले जाने के लिए वर्ष 2016 में प्रति मीट्रिक टन 16 रुपये किराया प्रति किलोमीटर किराया तय किया गया था।
इसके बाद से उसी दर पर उठान हो रही है। तब से किराए में कोई इजाफा नहीं हुआ है। जबकि अब गोदाम से समितियों तक यूरिया ले जाने में प्रति एमटी 24 रुपये प्रति किलोमीटर किराया देना पड़ रहा है। इसी के चलते समितियां अब यूरिया की उठान से कन्नी काट रही हैं। इससे किसानों की मुश्किल बढ़ रही है। एआर कोआपरेटिव अमरेश मणि त्रिपाठी का कहना है कि सचिवों से बात करके उठान कराने को कहा गया है।
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जिला कृषि अधिकारी आरपी राना का कहना है कि जिला मुख्यालय पर यूरिया उपलब्ध है। सहकारी समिति के सचिव उठान नहीं कर रहे हैं। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही सहकारी समितियों पर यूरिया उपलब्ध कराई जाएगी। जांच कर ओवररेटिंग करने वाले दुकानदारों का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।
विकासखंड रेहरा बाजार की साधन सहकारी समिति अधीनपुर, मुबारकपुर, परसिया, मनुवागढ़, रमवापुर आदि में यूरिया नहीं है। किसानों को सरसों व गेहूं की बुआई करने के लिए 266 रुपये की यूरिया की बोरी दुकानों से 400 रुपये तक में खरीदनी पड़ रही है। निर्धारित मूल्य पर खाद न मिलने के कारण अधिकांश किसानों की खेती पिछड़ रही है।
किसान नेता रामउग्रह वर्मा ने बताया कि समितियों पर यूरिया नहीं है। दुकानदार 266 रुपये की यूरिया की बोरी 360 से 400 रुपये तक में बेच रहे हैं। किसान घिराऊ प्रसाद ने बताया कि यूरिया न मिलने से गेहूं व सरसों की फसल बर्बाद हो रही है। किसान सीताराम वर्मा ने बताया कि चार दिन से समितियों का चक्कर लगाने के बावजूद खाद नहीं मिली। मजबूरन महंगे दाम पर यूरिया लेनी पड़ी। किसान शाह मोहम्मद ने बताया कि यूरिया नहीं मिलने से शरद कालीन गन्ने की बुआई भी प्रभावित है।
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