गैसड़ी/बलरामपुर। तुलसीपुर तहसील के नेपाल सीमा से सटे भगवानपुर खादर व मंगुरहवा गांवों के बीच पुल न होने से बरसात के दौरान 30 गांव टापू बन जाते हैं। बूढ़ी राप्ती की बाढ़ का कहर आसपास के गांवों की 25 हजार की आबादी को हर वर्ष झेलना पड़ता है। नदी में बाढ़ आने पर हर वर्ष ग्रामीणों के हाथों बना जुगाड़ का पुल तेज बहाव में बह जाता है। पुल का निर्माण न होने से ग्रामीणों को आवागमन में समस्या उठानी पड़ रही है।
नेपाल सीमा से सटे भगवानपुर खादर व मंगुरहवा गांवों के बीच बूढ़ी राप्ती (बगहा) पहाड़ी नाला पर कटैयाभारी गांव के पास पुल न होने से बाढ़ में हर वर्ष 30 से अधिक गांव टापू बन जाते हैं। बाढ़ के बाद हर वर्ष ग्रामीण लकड़ी व बांस से जुगाड़ का पुल तैयार करते हैं, जिससे वह बूढ़ी राप्ती नदी को पार कर सकें। ग्रामीण पिंकू तिवारी व राजेश ने बताया कि बाढ़ के समय नदी पर पुल न होने से लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो जाता है।
गौराभारी, कटैयाभारी, लैबुड़वा, भगवानपुर खादर, धनकरपुर हाटी, मलदा, सकल्दा, सतनी व त्रिलोकपुर सहित 30 से अधिक गांव बूढ़ी राप्ती नदी की बाढ़ की धारा में फंस जाते हैं। बाढ़ के दौरान 25 हजार बीघे से अधिक जमीन डूब जाती है, किसानों की खरीफ की फसलों का भारी नुकसान होता है। इस वर्ष भी इन गांवों के लोगों को बाढ़ का कहर झेलना पड़ेगा।
कई बार की गई पुल निर्माण की मांग
मोहम्मद आमिर व बेकारू ने बताया कि भगवानपुर खादर व मंगुरहवा गांवों के बीच बूढ़ी राप्ती नदी पर पक्का पुल का निर्माण कराने के लिए कई बार मांग की गई, लेकिन अभी तक पुल निर्माण की कवायद शुरू नहीं हों सकी है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि पुल का निर्माण कराकर उनकी समस्या का निराकरण कराया जाए।
प्रस्ताव तैयार कराने का निर्देश
ग्रामीणों ने भगवानपुर खादर व मंगुरहवा गांव के बीच बूढ़ी राप्ती नदी पर पुल का निर्माण कराने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है। संबंधित विभाग को पुल निर्माण का प्रस्ताव तैयार कराने का निर्देश दिया गया है। बजट मिलने पर पुल निर्माण कराया जाएगा।
- राकेश कुमार जयंत, एसडीएम तुलसीपुर