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तीन लाख बच्चों के अभिभावक जानेंगे शिक्षा का अधिकार

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बलरामपुर। बेसिक शिक्षा के 1908 स्कूलों में पढ़ने वाले तीन लाख बच्चों के अभिभावकों को शिक्षा के अधिकार के बारे में जानकारी दी जाएगी। अभियान को परवान चढ़ाने के लिए जिले के सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापक, एसएमसी के अध्यक्ष व ग्राम प्रधान सहित 5724 को जिले के सभी 10 संसाधन केंद्रों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पर खर्च करने के लिए शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग को 12.95 लाख रुपये की धनराशि दी है।
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शिक्षा सत्र 2021-22 में जिले के 1897 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट स्कूलों के 2.93 लाख छात्र-छात्राओं और 11 कस्तूरबा गांधी अवासीय बालिका विद्यालयों की 1100 बेटियों के साथ उनके अभिभावकों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम व शासन से मिलने वाली सुविधाओं के बारे में अवगत कराया जाएगा।
मुहिम को सफल बनाने के लिए 1908 विद्यालयों के 5724 प्रधानाध्यापकों, कस्तूरबा के वार्डेन, विद्यालयों में गठित प्रबंध समितियों के अध्यक्षों व ग्राम प्रधानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। जिले के सभी 10 शिक्षा क्षेत्रों के एक नगर व नौ ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम 30 नवंबर तक पूरे कराए जाएंगे।
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जिले के हर विद्यालय से तीन-तीन प्रतिभागी प्रशिक्षण में शामिल होंगे। प्रशिक्षण पर 12 लाख 94 हजार 800 रुपये खर्च किए जाएंगे। जलपान व भोजन पर 150 रुपये प्रति प्रतिभागी की दर से 85 हजार 8600 रुपये, स्टेशनरी, फोल्डर, पेन, राइटिंग पैड, स्पाइरल, सामग्री व बैज पर 50 रुपये प्रति प्रतिभागी की दर 28 हजार 6200 रुपये और टेंट, माइक, बैनर, कुर्सी-मेज आदि पर 15000 रुपये प्रति ब्लॉक की दर से एक लाख 50 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे।
डीसी निरंकार पांडेय ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान एक नगर व नौ ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर उपस्थित प्रधानाध्यापकों, वार्डेन, एसएमसी अध्यक्षों व ग्राम प्रधानों को डीबीटी व विद्यालय में बच्चों को दी जा रही सुविधाओं, आउट ऑफ स्कूल बच्चों के लिए शारदा कार्यक्रम कराने, समर्थ कार्यक्रम एवं विद्यालयों की जैसे उपकरण व यंत्र, स्पेशल एजुकेटर्स के माध्यम से दिव्यांग बच्चों को वर्कशीट आदि के बारे में बताया जाएगा।
प्रशिक्षण में विद्यालय प्रबंध समिति व ग्राम पंचायत के साथ समन्वयक बनाकर एसएमसी का गठन, प्रक्रिया, कार्य-दायित्व, वित्तीय दायित्व, मासिक बैठक व एजेंडा आदि बिंदु भी शामिल होंगे। मार्च 2022 तक सभी स्कूलों को 19 पैरामीटर पर कायाकल्प कराने के लिए बताया जाएगा।
निपुण भारत एवं मिशन प्रेरणा के तहत विद्यालयों में गुणवत्ता शिक्षा, तीन से छह साल तक के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर दी जा रही सुविधाओं, ग्राम प्रधान से विद्यालयों व आंगनबाड़ी केंद्रों के विकास में सहयोग लेने के बारे में सुझाव दिया जाएगा।
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