फोटो-1-बलरामपुर में पापड़ व नमकीन दिखाती समूह की महिलाएं ।-संवाद
हरैया सतघरवा। कभी घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित रहने वाली महिलाओं ने आज अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनाई है। विकास खंड के शिवपुरा गांव में संचालित जूही स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पापड़, नमकीन, चूरा और गुड़ के लड्डू जैसे उत्पाद तैयार कर न सिर्फ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
समूह की अध्यक्ष गीता के नेतृत्व में सोनी, प्रभावती, लक्ष्मी सहित 10 महिलाएं पिछले तीन वर्षों से मिलकर स्वरोजगार का कार्य कर रही हैं। शुरुआत में इन महिलाओं के सामने पूंजी की कमी, बाजार तक पहुंच और उत्पादों की बिक्री जैसी कई चुनौतियां थीं। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सामूहिक प्रयासों के बल पर अपने काम को आगे बढ़ाया। महिलाएं घरों में तैयार किए जाने वाले पापड़, नमकीन, डिब्बा, चूरा और गुड़ के लड्डुओं का उत्पादन करती हैं। स्थानीय बाजारों और मेलों में इनके उत्पादों की मांग बढ़ने से समूह की आय में भी लगातार वृद्धि हुई है। इससे महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिली है और वे परिवार के खर्चों में सहयोग करने के साथ बच्चों की शिक्षा और अन्य जरूरतों को भी बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं। समूह की सदस्य प्रभावती बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे आर्थिक फैसलों में भी भागीदारी निभा रही हैं और समाज में उनकी पहचान मजबूत हुई है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर आसपास के गांवों की महिलाएं भी स्वरोजगार से जुड़ने के लिए आगे आ रही हैं। अब तक करीब 70 महिलाओं ने स्वरोजगार अपनाया है।
लगातार बढ़ रहा है कारोबार, पांच लाख तक हर साल आमदनी
शुरुआत में तो उत्पाद की बिक्री सीमित थी लेकिन अब बरदौलिया, मणिपुर बाजार के साथ ही तुलसीपुर और गैसड़ी क्षेत्रों में भी उत्पाद बिक रहे हैं। समूह की सदस्य लक्ष्मी ने बताया कि सिद्धार्थनगर तक उत्पाद भेजा जा रहा है। मांग बढ़ी है। इसमें चूरा और गुड़ के लड्डू की मांग काफी है, वहीं नमकीन की बिक्री भी चाय की दुकानों के साथ ही जनरल स्टोर पर हो रही है। 100 से अधिक दुकानदार संपर्क में हैं, जिन्हें नियमित आपूर्ति की जाती है। साल भर में पांच लाख के करीब की आमदनी होती है। लगातार उत्पाद बढ़ाया जा रहा है और महिलाएं जुड़ रहीं हैं।