बलरामपुर। पत्नी और तीन बच्चों को ले जाने के मामले में कार्रवाई की मांग करने पहुंचे व्यक्ति ने पुलिसकर्मियों पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने, गाली-गलौज करने और मारपीट करने का आरोप लगाया है। मामले में विशेष न्यायालय एससी-एसटी ने थाना ललिया के तत्कालीन थानाध्यक्ष, चौकी इंचार्ज समेत नौ लोगों के खिलाफ दाखिल प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने 17 नवंबर को परिवादी का बयान दर्ज करने की तिथि निर्धारित की है।
ललिया क्षेत्र निवासी अमरजीत सोनकर ने न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि चार अगस्त को वह मजदूरी करने गया था। रात करीब नौ बजे घर लौटा तो उसकी पत्नी निर्मला देवी और तीन बच्चे गायब थे। घर में रखे बक्से का ताला टूटा हुआ था। उसमें करीब आठ लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवर और 45 हजार रुपये नकद रखे थे। पीड़ित ने गांव के पंकज लाल उर्फ किन्नू पर पत्नी, बच्चों और जेवर-नकदी लेकर जाने का आरोप लगाया।
आठ अगस्त को पुलिस ने पंकज, उसकी पत्नी और बच्चों को बरामद किया। पीड़ित का आरोप है कि थाने में शिकायत करने पर पुलिसकर्मियों ने उसके साथ जातिसूचक गाली-गलौज की और लात-घूंसों व थप्पड़ों से पिटाई की। उसने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी पत्नी और दो बच्चों को पंकज के साथ भेज दिया।
पीड़ित ने 29 अगस्त को रजिस्टर्ड डाक से एसपी को शिकायत भेजी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। विशेष न्यायाधीश ने 28 अक्तूबर को बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। साथ ही, 17 नवंबर को परिवादी का बयान दर्ज करने की तिथि तय की है।