बलरामपुर के पचपेड़वा में स्थित राजकीय महाविद्यालय।
बलरामपुर। जिले के अंतिम छोर व भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में रहने वाले युवाओं को परा स्नातक तक की पढ़ाई के लिए 60 किलोमीटर दूर तक की दौड़ लगाना पड़ रही है। इसके चलते ही उच्च शिक्षा पाने की चाहत के बावजूद अधिकांश युवाओं को संसाधनों के अभाव में पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को विवश होना पड़ रहा है।
पचपेड़वा में संचालित राजकीय महाविद्यालय में स्नातक विषयों की ही मान्यता है। क्षेत्र के विद्यार्थी इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने के बाद राजकीय महाविद्यालय में प्रवेश लेते हैं। राजकीय महाविद्यालय होने के कारण कम खर्च में ही विद्यार्थी आसानी से स्नातक की पढ़ाई को पूरी करते हैं। राजकीय महाविद्यालय के स्नातक कक्षा में इस वर्ष 177 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। राजकीय महाविद्यालय में अभी परा स्नातक के किसी भी विषय की कक्षा को मान्यता नहीं मिली है। इस कारण यहां के विद्यार्थियों को पीजी की पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय स्थित एमएलके पीजी कॉलेज में प्रवेश लेकर ही पीजी की पढ़ाई पूरी करना पड़ती है।
फीस में अंतर बना बड़ी परेशानी
राजकीय एवं सहायता प्राप्त महाविद्यालय के फीस में भी भारी अंतर है। पचपेड़वा स्थित राजकीय महाविद्यालय में एक वर्ष (दो सेमेस्टर) की पढ़ाई पर जहां 3500 रुपए शुल्क देना पड़ता है, वहीं सहायता प्राप्त महाविद्यालय में विभिन्न विषयों व प्रायोगिक विषयों की पढ़ाई पूरी करने पर 46 सौ से 11 हजार रुपये तक शुल्क चुकाना होता है। ऐसे में सहायता प्राप्त महाविद्यालय में पढ़ने के लिए जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ पढ़ाई में बड़ी बाधा बनता है। इसके साथ पीजी की पढ़ाई के लिए हर दिन 60 किलोमीटर की दूरी तय करने का खर्च भी परेशानी को दो गुना बढ़ाता है।
पीजी की मान्यता के लिए भेजा गया पत्र
राजकीय महाविद्यालय में परास्नातक की कक्षाओं के संचालन व मान्यता के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। इस पर अनुमति मिलते ही महाविद्यालय में पीजी कक्षाओं का संचालन तत्काल शुरु कराया जाएगा।
डॉ. भानु प्रताप सिंह, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय पचपेड़वा