जांच एजेंसियों की एक टीम ने बुधवार को उतरौला क्षेत्र का गोपनीय भ्रमण किया। माना जा रहा है कि 50 से अधिक लोगों की छांगुर से सांठगांठ थी, जिसमें 23 लोग स्थानीय ही हैं। कई प्रधान व पूर्व प्रधानों के नाम भी चर्चा में हैं। बीते दिनों ईडी की जांच से विदेशी बैंकों से लेनदेन होने का राजफाश हुआ है। इसके साथ ही एसटीएफ की जांच में बड़े पैमाने पर लोगों को अवैध धर्मांतरण मुहिम से जोड़े जाने की बात भी कही जा रही है।
खाड़ी देशों में भी छांगुर की गहरी पैठ के सुराग मिले हैं, जिससे उसने काफी कमाई की है। माना जा रहा है कि किसी न किसी बहाने छांगुर लोगों को लाभ देता था और अपनी पैठ गहरी कर रहा था। विदेशी फंड के बंटवारे में स्थानीय लोगों के साथ ही सरकारी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं। आयकर विभाग ने फरवरी महीने में ही एक रिपोर्ट देकर गलत ढंग से हो रही कमाई की ओर इशारा किया था। अब आयकर विभाग फिर से पूरे मामले की पड़ताल करा रहा है।
जमीन खरीदने के लिए बिचौलियों को साधता था छांगुर
अवैध धर्मांतरण कराने में पैसे की बाधा न आए, इसके लिए छांगुर ने जमीनों को खरीदने और बेचने की रणनीति तैयार की थी। उसने नवीन और महबूब को पूरी छूट दी थी। करीब 50 करोड़ रुपये इस कार्य में लगाने थे। इसके लिए प्रदेश के कई जिलों में जमीन बिक्री कराने वाले बिचौलियों से संपर्क भी साधा गया था। छांगुर के एक राजदार का दावा है कि उसने कई जिलों में बयाना यानी अग्रिम राशि भी दे रखी है। कुछ जमीनों का सौदा तो जुबानी ही है।
न्यायालय के बाबू से बनाई थी कई बड़े अपराधियों तक पहचान
न्यायालय के बाबू राजेश उपाध्याय की गिरफ्तारी हो चुकी है। उसी के माध्यम से छांगुर ने कई अपराधियों से संपर्क बनाया था। समुदाय विशेष के आपराधिक कार्य करने वालों को खुद से जोड़ा था। उनकी जमानत आदि का खर्च भी उठाया था। अभी तक ऐसे लोगों की पहचान नहीं हो सकी है। बीते दिनों एटीएस के एक गवाह को धमकी देने के मामले में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई है।