बलरामपुर। बलरामपुर देहात में विवादित भूमि पर सड़क निर्माण का मामला अब अवमानना की कार्रवाई तक पहुंच गया है। हाईकोर्ट के 14 जनवरी के आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मुजीब अहमद समेत सात लोगों ने अवमानना याचिका दाखिल की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मामले में नगर पालिका परिषद बलरामपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी/अधिशासी अधिकारी लाल चंद मौर्य समेत तीन विपक्षी पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। उधर, नगर पालिका में पूरे दिन जवाब तैयार करने की प्रक्रिया चलती रही। ईओ ने इस मामले में किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इन्कार किया।
न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने एक अक्तूबर 2026 को मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने नोटिस की तामील के लिए सात कार्य दिवसों के भीतर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। संबंधित पक्षकारों को पांच नवंबर को उपस्थित होकर यह बताना होगा कि 14 जनवरी के आदेश के कथित उल्लंघन के आरोप में उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
मामला ग्राम बलरामपुर देहात के प्लॉट संख्या 1655 की 1.30 एकड़ भूमि से जुड़ा है। मूल रिट याचिका में मुजीब अहमद और अन्य याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उनकी भूमि का वैधानिक रूप से अधिग्रहण किए बिना उस पर मिट्टी डालकर सड़क बनाई जा रही है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, भूमि का अधिग्रहण भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम-2013, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम या किसी अन्य कानून के तहत नहीं किया गया।
14 जनवरी को न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने सभी प्रतिवादियों को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। नगर पालिका की ओर से बताया गया था कि रिट याचिका की जानकारी मिलने के बाद विवादित भूमि पर निर्माण कार्य रोक दिया गया है। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए मुजीब अहमद समेत सात लोगों ने अवमानना याचिका दाखिल कर दी।