नेपाल के लमही उद्योग वाणिज्य संघ के पदाधिकारियों ने सोमवार को कहा कि कोयलाबास से कारोबार की असीम संभावनाएं हैं। बढ़नी और रूपईडीहा से ज्यादा प्रभावी क्षेत्र जरवा है। यहां पर कारोबार के साथ ही पर्यटन से जुड़े उद्योग को भी बढ़ावा मिल सकेगा। मीडिया प्रभारी राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि सीमा पर बैंक भी स्थापित किया जाए। इसके लिए भारत और नेपाल के वरिष्ठ अधिकारियों की जल्द ही संयुक्त बैठक होने की उम्मीद है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष श्याम बिहारी अग्रहरि और महामंत्री रूपचंद्र गुप्ता ने बताया कि हाल ही में हुई वार्ता के बाद कई अहम मुद्दे हल होते दिख रहे हैं। अब नेपाल सरकार की पहल का इंतजार है। वहां के व्यापारी भी सक्रिय हो गए हैं। नेपाल के उद्योग वाणिज्य संघों ने भरोसा जताया कि कारोबार की पहल से कोयलाबास के साथ ही लमही, घोड़ाही और गढ़वा क्षेत्र के लोगों का व्यापार तेज होगा। पदाधिकारी बसंत जोशी, नरेश श्रेष्ठ, ओम प्रकाश बैसाल कहते हैं कि व्यापारिक कार्य बढ़ाने की पहल हो रही है। इसकी ज्यादातर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
उन्होंने उम्मीद जताई कि जरवा कस्टम में भंसार की सीमा बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। जरवा और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापारी हीरालाल यादव, सत्यनारायण गिरी, रामजी, राघव राम थारू ने कहा कि यह बॉर्डर सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि तरक्की का दरवाजा है। इसे दोबारा खोलने से दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्र विकास की नई राह पर चल सकेंगे।
चावल व आलू का निर्यात भी बढ़ेगा
नेपाल सीमा पर कारोबार बढ़ने की उम्मीद से किसान भी उत्साहित हैं। उन्हें उम्मीद है कि चावल और आलू का निर्यात बढ़ेगा, जिससे आमदनी बढ़ेगी। किसान हीरालाल ने बताया कि नेपाल में आलू व चावल की काफी मांग है। इसके अलावा हस्तशिल्प व मसाला उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। तुलसीपुर के व्यापारियों में इस बात से उत्साह है कि अब उनके साथ ही नेपाल में भी भंसार सीमा वृद्धि की मांग तेज हो गई है।