रेहराबाजार। विकास खंड के ग्राम लौकियां ताहिर निवासी नवनीत ने पारंपरिक खेती से अलग हटकर इस वर्ष डेढ़ बीघा जमीन में व्यावसायिक स्तर पर गुलाब की खेती शुरू की है। उन्होंने गांव के दो लोगों को रोजगार भी दिया है।
साकेत महाविद्यालय अयोध्या से स्नातक करने के बाद नवनीत ने गांव लौटकर खेती को ही अपना व्यवसाय बनाया। उन्होंने तीन महीने पहले डेढ़ बीघा क्षेत्रफल में गुलाब की पूसा क्रिस्टल, रक्तगंधा, आइसबर्ग और शाहजहांपुर प्रजाति के लगभग 455 पौधे 3×3 फीट की दूरी पर लगाए।
खेत में लाल, पीला, काला, नारंगी, सफेद, फिरोजी, आसमानी और हरे सहित 28 रंगों के आकर्षक गुलाब की कलमें रोपी हैं। अभी पौधे छोटे हैं, कलियां आनी शुरू हो गईं हैं। कुछ दिन में फूल आने लगेंगे।
नवनीत ने बताया कि गुलाब के फूलों की वर्ष भर मांग रहती है। सबसे अधिक फूलों की बिक्री अयोध्या की शृंगार घाट मंडी में होती है। बताया कि डेढ़ बीघा भूमि में 455 पौधे लगाने में करीब 50 हजार रुपये की लागत आई। खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी सहित रखरखाव पर प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपये खर्च होते हैं।
बताया कि हर सप्ताह करीब 7,500 रुपये मूल्य के फूल तैयार होते हैं, जिससे एक माह में 30 हजार रुपये से अधिक की बिक्री होगी। सभी खर्च निकालने के बाद लगभग 15 हजार रुपये प्रतिमाह की शुद्ध बचत की संभावना है।
साल भर में पांच लाख सालाना आमदनी का अनुमान
नवनीत ने बताया कि पौधारोपण के लगभग तीन माह बाद पौधे फूल देना शुरू कर देते हैं, सात वर्षों तक फूल मिलते हैं। पौधों की बढ़वार के साथ फूलों की संख्या बढ़ती जाती है, जिससे आय में भी लगातार वृद्धि होती है। उनका अनुमान है कि एक वर्ष बाद इस खेती से चार से पांच लाख रुपये वार्षिक आमदनी हो सकती है। एडीओ कृषि रणधीर सिंह ने बताया कि बागवानी आधारित खेती किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती है। वर्षभर मांग बनी रहती है, इसलिए किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ फूलों की खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।