बलरामपुर के बड़हरा गांव में सब्जी के खेत में खड़ी सीमा देवी।
पेहर बाजार (बलरामपुर)। शिक्षा के क्षेत्र में अति पिछड़े इस जिले में महिलाओं की हालत और भी बदतर है। महिलाओं को न तो पढ़ाई के लिए पर्याप्त संसाधन हैं और न ही रोजगार पाने के लिए अवसर मिल पाता है। ऐसे में महिलाएं चूल्हा-चौका तक ही सीमित रह जाती हैं। ऐसी परिस्थितियों में ग्राम बड़हरा निवासी सीमा देवी महिलाओं के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरी हैं। कड़ी मेहनत व लगन के साथ खेती करने वाली सीमा क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं। सीमा ने अब तक करीब 600 महिलाओं को खेती-किसानी के आधुनिक तरीके सिखाकर आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है।
सीमा देवी ने बताया कि उनके पति शेष नारायण लेखपाल हैं। उन्हें खेती करने का समय नहीं मिल पाता है। वे खेतों को बंटाई पर दे देते थे। इससे लागत तो लगानी पड़ती थी लेकिन अनाज बहुत कम ही मिल पाता था। पैदावर कम और लागत अधिक होने से मैंने स्वयं खेती करने का जिम्मा संभाला।
खेती करने के लिए पहले मैंने नई तकनीकी सीखी और उसी के माध्यम से काम शुरू कर दिया। साथ ही छोटे किसानों व महिलाओं को भी नई तकनीकी से खेती करने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे सीमा की मेहनत रंग लाई। आज उनके साथ करीब 600 किसान व महिलाएं जुड़कर नई तकनीकी से खेती कर रही हैं। वे महिलाओं को अच्छे व उन्नत किस्म के बीज उत्पादन का तरीका भी सीखा रही हैं। सीमा क्षेत्र में महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण हैं। उनसे जुड़कर महिलाओं की जिंदगी संवर रही है।
किसानों को दिलाया योजनाओं का लाभ
सीमा ने बताया कि जानकारी न होने के कारण किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता था। ऐसे में किसान बीज, खाद व कृषि यंत्र आदि बाजार से महंगे दाम पर खरीदते थे। लागत अधिक और मुनाफा कम होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थित काफी बदतर थी। इसकी जानकारी देते हुए उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है। इससे किसानाें की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है।