बलरामपुर। महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के श्रमिकों को अब सीमित रोजगार पर आश्रित नहींं रहना पड़ेगा। 18 से 45 वर्ष की आयु वाले मनरेगा जॉब कार्डधारकों को कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट व हेल्थ केयर के साथ ही कई ट्रेड में प्रशिक्षित कर निपुण बनाया जाएगा। इससे पंचायत संबंधी कार्य पर निर्भरता खत्म होने से मनरेगा श्रमिक आत्म निर्भर बन सकेंगे।
कार्य योजना के पहले चरण में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की तरफ से सौ दिन का काम पूरा करने वाले श्रमिकों को जिस काम में रुचि है, उस ट्रेड में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसको लेकर ग्राम पंचायतवार श्रमिकों का सर्वे किया जा रहा है। इसके लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना की उन्नति योजना से सभी मनरेगा श्रमिकों को जोड़ा जाना है। पहले चरण में पांच हजार ऐसे श्रमिकों को प्रशिक्षण देने के लिए बुलाया जाएगा, जिन्होंने सौ दिन का काम पूरा कर लिया है। इसके बाद अन्य श्रमिकों का प्रशिक्षण कार्य शुरू होगा।
योजना के तहत जिले के दो लाख मनरेगा श्रमिकों में से एक लाख श्रमिकों को साल भर में मैनेजमेंट व हेल्थ केयर में प्रशिक्षित कर निपुण बनाना है। पहली बार मनरेगा श्रमिकाें को रोजगार मुहैया करवाने के लिए व्यवसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें इलेक्ट्रानिंक, रिटेलर समेत 50 से अधिक ट्रेड के विषयों को शामिल किया गया है। संवाद
जिला कौशल प्रबंधक पंकज कुमार सिंह ने बताया कि 100 दिन का कार्य पूरा कर जॉब कार्डधारी मनरेगा श्रमिकों का पंजीकरण शुरू हुआ हो गया है। उन्नति योजना के तहत श्रमिकों के प्रशिक्षण का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। कौशल विकास मिशन के कर्मचारी गांवों में अभियान चलाकर योजना के बारे में श्रमिकों को जागरूक कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक मनरेगा श्रमिकों को प्रशिक्षण दिलाकर मनरेगा के साथ ही अन्य रोजगारपरक कार्यों से से जोड़ना है। -
15जेएनडी07 : जाट धर्मशाला के मुख्य गेट का फोटो। संवाद