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Balrampur News: तीन गांवों नजर आए तेंदुए, दहशत में ग्रामीण

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बलरामपुर के रेहरापुरवा झौहना गांव में जानकारी लेते डीएम विपिन कुमार जैन ।-स्रोत: विभाग
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बलरामपुर। सोहेलवा वन क्षेत्र में दो दिनों से दिख रहा बाघ तो अब नजर नहीं आ रहा है लेकिन तेंदुए लगातार गांवों और खेतों में पहुंच रहे है। बीते शनिवार की रात मां की गोद से दुधमुंहे रोहित को उठा ले जाने की घटना के बाद अन्य कई गांवों में तेंदुए नजर आए हैं। रविवार और सोमवार को जुम्मनडीह, त्रिलोकपुर और नंदनगर गांवों में तेंदुए नजर आए। पूरा क्षेत्र अलर्ट मोड पर है। इससे ग्रामीणों में दहशत है।गांवों में अफरा-तफरी है। ग्रामीण रातभर पहरा दे रहे हैं। खेतों की सिंचाई व फसल की रखवाली बंद है।
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ललिया क्षेत्र के नंदनगर जुम्मनडीह गांव में रविवार रात खेत में ट्रैक्टर से जुताई कर रहे सोमई विश्वकर्मा की नजर अचानक पास की झाड़ियों में बैठे तेंदुए पर पड़ी। सोमई घबराकर वहां से भागे और गांव पहुंचे और सूचना दी। इसके बाद ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर रातभर पहरा देते रहे। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सरोज वर्मा ने बताया कि एक सप्ताह से तेंदुआ गांव के आसपास घूम रहा है, लेकिन वन विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। क्षेत्रीय वनाधिकारी शत्रोहन लाल ने कहा कि टीम भेजी जा रही है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
त्रिलोकपुर में वनरोज के शिकार के बाद फिर लौटा तेंदुआ

गौरा चौराहा क्षेत्र के त्रिलोकपुर गांव में सोमवार सुबह फिर तेंदुआ दिखा। इससे पहले रविवार को तेंदुए ने ग्रामीणों के सामने वनरोज का शिकार किया था। सोमवार सुबह भी तेंदुआ उसी स्थान पर दिखाई दिया। ग्रामीण मुमताज और हकीम का कहना है कि अब बच्चों और पशुओं को लेकर सबसे ज्यादा डर है। अगर तेंदुआ गांव में घुस आया तो बड़ी घटना हो सकती है। ग्राम प्रधान मोहम्मद इरफान ने बताया कि वन विभाग को सूचना देने के बावजूद कल से कोई नहीं पहुंचा। एसडीओ मनोज कुमार के अनुसार वनकर्मियों की टीम मौके पर भेजी जा रही है।
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रेहारपुरवा में मासूम की मौत के बाद पिंजरा लगाया, पर नहीं दिखे पगचिह्न
- डीएम ने किया गांव का निरीक्षण, जंगल से सटे गांवों में गन्ना किसानों को पहले पर्ची देने के दिए निर्देश
हरैया सतघरवा। हरैया सतघरवा क्षेत्र के रेहारपुरवा झौहना गांव में शनिवार रात तेंदुआ मां की गोद से मासूम को उठा ले गया था। वन विभाग ने गांव के पास पिंजरा लगाया है, लेकिन एसडीओ मनोज कुमार के अनुसार घटनास्थल के पास अभी तक तेंदुए के पगचिह्न नहीं मिले हैं। वन विभाग रात-दिन गांवों में जागरूकता अभियान चला रहा है।
उधर, डीएम विपिन कुमार जैन ने सोमवार को गांव का भ्रमण किया और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। डीएम ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वन विभाग को निगरानी तेज करने का निर्देश दिया। कहा कि ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाएं। सोहेलवा जंगल से सटे गांवों में पहले गन्ना पर्चियों का वितरण कराएं, जिससे खेतों से गन्ना काटकर जोखिम को कम किया जा सके है। डीएम ने ग्रामीणों से संवाद किया। गांव के लोगों ने बताया कि रेंजर शत्रोहन लाल बच्चे के पिता शेषराम और मां चनावती को मदद दिलाने के लिए जिला मुख्यालय ले गए हैं। इस दौरान सदर एसडीएम हेमंत कुमार गुप्त व बीडीओ पल्लवी सचान आदि मौजूद रहे।
सुरक्षा के लिए 19 किमी तक लगेगी लोहे की जाली
तेंदुए के हमले से ग्रामीणों को बचाने के लिए बरहवा रेंज में 19 किलोमीटर तक लोहे की जाली लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वन विभाग के एसडीओ मनोज कुमार ने बताया कि जल्द ही क्षेत्र के स्थिति की पूरी रिपोर्ट भेजकर प्रस्ताव को जल्द मंजूरी दिलाने और स्वीकृति कराने का प्रयास किया जाएगा।


150 गांवों में दहशत, स्कूलों में भी चल रहा जागरूकता अभियान
सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग के बरहवा और बनकटवा रेंज से सटे करीब 150 गांव तेंदुए के भय में जी रहे हैं। रतनवा, अतरपरी, भवानीडीह, रामडीह, कटकुइयां, भटपुरवा, माधवडीह, खवासपुरवा, मैनडीह, मोतीपुर कला, भगवानपुर, आनंदपुरवा, दर्जिनियां, चरनगहिया समेत कई गांवों में लोगों ने रातभर पहरा दिया। बरहवा रेंज के क्षेत्रीय वनाधिकारी बृजेश सिंह परमार ने लंबीकोहल प्राथमिक विद्यालय में बच्चों व ग्रामीणों को तेंदुए से बचाव के तरीकों की जानकारी दी। टीम में वन दरोगा कुशाग्र पाठक और गौरव मिश्रा भी मौजूद रहे।
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