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Balrampur News: मशीन है, डॉक्टर नहीं... तीन महीने से ठप सरकारी अल्ट्रासाउंड जांच

Tue, 28 Jul 2026 11:16 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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फोटो-7-बलरामपुर के तुलसीपुर में बंद अल्ट्रासाउंड कक्ष ।-संवाद
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तुलसीपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) तुलसीपुर में करीब तीन महीने पहले शुरू की गई अल्ट्रासाउंड जांच सुविधा अब भी सुचारु नहीं हो सकी है। बड़े प्रचार-प्रसार और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में शुरू हुई यह सुविधा प्रशासनिक लापरवाही, प्रशिक्षित चिकित्सक की कमी और अव्यवस्थित व्यवस्था के कारण मरीजों के लिए बेकार साबित हो रही है। अस्पताल में मशीन तो उपलब्ध है, लेकिन जांच करने के लिए नियमित चिकित्सक नहीं हैं।
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सीएचसी में प्रतिदिन 300 से 350 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या गर्भवती महिलाओं की होती है, जिन्हें प्रसव पूर्व जांच के लिए अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ती है। सरकारी अस्पताल में यह सुविधा मिलने की उम्मीद से मरीजों को राहत की आस जगी थी, लेकिन तीन महीने बाद भी हालात नहीं बदले हैं।

मंगलवार को भी कई गर्भवती महिलाएं अल्ट्रासाउंड कराने के लिए अस्पताल पहुंचीं, लेकिन डॉक्टर के नहीं मिलने से उन्हें बिना जांच कराए लौटना पड़ा। सीएचसी अधीक्षक के अनुसार डॉ. निशा गुप्ता एक सप्ताह के अवकाश पर हैं। वहीं, मंगलवार को रोस्टर के अनुसार ड्यूटी पर तैनात डॉ. बालमुकुंद भी अस्पताल नहीं पहुंचे।
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रोस्टर बना, व्यवस्था नहीं सुधरी

स्वास्थ्य विभाग ने अल्ट्रासाउंड जांच के लिए महाराजगंज पीएचसी में तैनात डॉ. बालमुकुंद को सोनोग्राफी का प्रशिक्षण दिलाकर सोमवार, मंगलवार और बुधवार को सीएचसी तुलसीपुर में तैनाती दी थी। जबकि बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार को डॉ. निशा गुप्ता की ड्यूटी निर्धारित की गई थी।

अस्पताल सूत्रों और मरीजों का कहना है कि पिछले तीन महीनों में डॉ. बालमुकुंद कुछ ही दिनों तक अस्पताल पहुंचे। वहीं, डॉ. निशा गुप्ता की तैनाती तो कर दी गई, लेकिन उन्हें सोनोग्राफी का प्रशिक्षण नहीं मिला है। इससे अल्ट्रासाउंड जांच व्यवस्था नियमित नहीं हो पा रही है।

10 किलोमीटर दूर से आई गर्भवती महिला को लौटना पड़ा

ग्राम खैरा की आशा कार्यकर्ता सुनैना गर्भवती महिला रेखा को करीब 10 किलोमीटर दूर से अल्ट्रासाउंड कराने सीएचसी तुलसीपुर लेकर पहुंचीं। काफी देर इंतजार के बाद भी डॉक्टर नहीं मिले, जिसके बाद उन्हें बिना जांच कराए वापस लौटना पड़ा।

मरीज संगीता ने बताया कि सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी केंद्र पर 600 से 700 रुपये खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के लिए बार-बार इतना खर्च उठाना मुश्किल है।

स्थानीय निवासी अर्जुन कुमार और श्याम बिहारी ने कहा कि सोनोग्राफी जैसी महत्वपूर्ण जांच प्रशिक्षित चिकित्सक से ही कराई जानी चाहिए। केवल मशीन उपलब्ध करा देने से मरीजों को लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने सीएचसी तुलसीपुर में स्थायी रूप से प्रशिक्षित चिकित्सक या रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की मांग की है।

फोटो-7-बलरामपुर के तुलसीपुर में बंद अल्ट्रासाउंड कक्ष ।-संवाद

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