बलरामपुर। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में शुक्रवार को रैबीज के प्रबंधन को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ब्लॉक स्तरीय चिकित्साधिकारी, फार्मासिस्ट व स्टाफ नर्सों को रैबीज से बचाव के लिए तमाम जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण का शुभारंभ करते हुए सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने कहा कि रैबीज का यदि समय से इलाज नहीं शुरू किया गया तो यह जानलेवा हो जाती है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में रैबीज प्रबंधन पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। एसीएमओ डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि यदि कुत्ते व बंदरों के काटने के बाद शून्य, तीन, सात और 28 दिन पर रैबीज का टीका लगा दिया जाय तो पीड़ित की जान बचाई जा सकती है। रैबीज के नियंत्रण के लिए एक मोबाइल एप भी तैयार किया गया है।
इसके बारे में जिला व ब्लॉक स्तरीय चिकित्सक व कर्मियों को जागरूक किया जाना है। इस कार्यक्रम के तहत वर्ष 2030 तक रैबीज से मृत्यु दर शून्य करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस अवसर पर एसीएमओ डॉ. अजय कुमार शुक्ल, डॉ. अनिल कुमार चौधरी, जिला मलेरिया अधिकारी राजेश कुमार पांडेय व डॉ. श्याम जी श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।