बलरामपुर। बहुचर्चित स्वास्थ्य घोटाले की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। फर्जी भुगतान और सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच के साथ विजिलेंस ने मुख्य आरोपी तथा घोटाले के दौरान विभिन्न जिलों में तैनात रहे संदिग्ध अधिकारियों और कर्मचारियों की चल-अचल तथा बेनामी संपत्तियों की पड़ताल तेज कर दी है। इसके लिए देवीपाटन, अयोध्या और लखनऊ मंडल के कुल 13 जिलों तक जांच का दायरा बढ़ाया गया है।
संपत्तियों का रिकॉर्ड जुटाने के लिए विजिलेंस ने आईजी स्टांप कार्यालय से भी रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2014 से 2022 के बीच हुए इस घोटाले से अर्जित धन को जमीन, मकान, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य निवेशों में खपाए जाने की आशंका है। इसी के मद्देनजर विजिलेंस की टीमें रजिस्ट्री कार्यालयों से अभिलेख जुटाने के साथ बैंक खातों, निवेश, जीएसटी रिकॉर्ड और रिश्तेदारों के नाम खरीदी गई संपत्तियों का मिलान कर रही हैं। जांच में आर्थिक अपराध शाखा और तकनीकी विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं।
जांच एजेंसी का फोकस उन संपत्तियों पर भी है, जो सीधे आरोपियों के नाम पर नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक रिश्तेदारों, करीबी सहयोगियों और कथित डमी व्यक्तियों के नाम निवेश किए जाने के संकेत मिले हैं। ऐसे मामलों में बैंक लेन-देन, आय के स्रोत और भुगतान के तरीकों की भी गहन जांच की जा रही है।
विजिलेंस सूत्रों का दावा है कि घोटाले की अवधि के दौरान मुख्य आरोपी समेत कुछ नामजद अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्तियों में असामान्य वृद्धि के संकेत मिले हैं। अब इन संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व और निवेश के स्रोत की पुष्टि की जा रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि दस्तावेजी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।