बलरामपुर। जिले में घटते हुए बाल लिंगानुपात को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने मुखबिर योजना शुरु की है। मुखबिर योजना के तहत कन्या भ्रूण हत्या व लिंग जांच करने वालों के खिलाफ शिकंजा कसा जाएगा। कन्या भ्रूण हत्या व लिंग जांच कराने वालों तथा संबंधित संस्थाओं को रंगेहाथ पकड़वाने वाले मुखबिरों को 60 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. घनश्याम सिंह ने सोमवार को बताया कि जिले में 30 रजिस्टर्ड अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित है। समय-समय पर इनकी जांच विभागीय अधिकारियों द्वारा की जाती है। सरकार द्वारा अवैध तरीके से लिंग जांच में लिप्त अपराधियों को पकड़ने तथा जन सामान्य की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुखबिर योजना लागू की गई है।
इस योजना के तहत लिंग जांच में दोषी व्यक्ति, संस्था एवं अल्ट्रासाउंड सेंटरों के बारे में सूचना देकर रंगेहाथ पकड़वाने के लिए एक मुखबिर, एक मिथ्या ग्राहक व एक सहायक की टीम बनाकर डिक्वॉय ऑपरेशन चलाया जाएगा। ऑपरेशन सफल होने पर मुखबिर को 60 हजार रुपये, मिथ्या ग्राहक को एक लाख रुपये तथा सहायक को 40 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के रुप में तीन किश्तों में दिया जाएगा।
नोडल अधिकारी पीसीपीएनडीटी/एसीएमओ डॉ. कमाल अशरफ ने बताया कि वर्तमान समय में जिले में एक हजार लड़कों पर 968 लड़कियां का असमान लिंगानुपात है। लड़कों की अपेक्षा लड़कियों का कम होना कोई प्राकृतिक स्थिति नहीं बल्कि लोगों द्वारा जानबूझ कर किया जा रहा काम है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि जिले में कहीं भी किसी भी केंद्र पर यदि भ्रूण की लिंग जांच की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तत्काल मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय को दें।
उन्होंने यह भी बताया कि मुखबिर योजना के तहत सूचना देने वाले का नाम व पहचान पूरी तरह से गुप्त रखा जाएगा। डिक्वॉय ऑपरेशन में गर्भवती महिला को मिथ्या ग्राहक के रूप में प्रयोग किया जाएगा।