बलरामपुर। बकरीद 21 जुलाई को मनाई जाएगी। मस्जिदों में क्षमता से आधे लोग ही बकरीद की नमाज पढ़ सकेंगे। नमाज पढ़ते समय कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य है। खुले स्थान पर कुर्बानी नहीं की जाएगी। बकरीद के दिन प्रशासन के निर्देशों का हरहाल में पालन किया जाएगा।
शहरमुफ्ती मौलाना मसीह अहमद कादरी ने बताया कि ईद-उल-अजहा मुसलमानों का प्रमुख त्योहार है। इसी महीने में आर्थिक रूप से मजबूत मुसलमान भाई-बहन हज करने के लिए सऊदी-अरब जाते हैं।
कोविड-19 के कारण इस वर्ष भी हज की यात्रा पर लोग नहीं जा सके। बकरीद त्योहार पर हजरत इब्राहिम अलैहहिस्सलाम की सुन्नत अता करते हुए जानवर की कुर्बानी की जाती है। कोविड-19 के चलते इस बार बकरीद की नमाज ईदगाहों में सामूहिक रूप से नहीं पढ़ी जाएगी।
मस्जिदों में उसकी क्षमता से आधे लोग ही बकरीद की नमाज कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए अता करेंगे। सोशल डिस्टेसिंग का पालन करने के साथ चेहरे पर मास्क लगाएंगे। नमाज के बाद कुर्बानी करने वाले लोग साफ सफाई का ध्यान रखते हुए खुले में जानवरों की कुर्बानी नहीं करेंगे।
कुर्बानी करते समय खून नाली या सड़क की पटरी पर न बहे इसके लिए गड्ढे में खून व बकरे का अवशेष दफन करेंगे। शहर मुफ्ती ने अपील किया है कि मुस्लिम धर्म के लोग बकरीद त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाएं।
कोई ऐसा कार्य न करें जिससे दूसरे धर्म के लोग आहत हों। अफवाहों से बचें और जिले के गंगा-जमुनी तहजीब को कायम रखने में सहयोग करें। कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए कोविड प्रोटोकॉल का पालन हरहाल में किया जाए।