अस्पताल के वार्ड में मासूम दर्द से कराह रहा है। मासूम के शरीर के कई हिस्सों, दाएं हाथ, पैर, कंधा और पीठ पर गंभीर चोट और जलन के निशान हैं। मां सरिता देवी और पिता पिंगल थारू बेड के पास बैठकर लगातार उसके सिर पर हाथ फेर रहे हैं। पिता की आंखों में चिंता साफ झलकती है। बेटे की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद में पूरा परिवार चिंतित है।
आयुष्मान कार्ड भी नहीं, इलाज पर संकट
परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। आयुष्मान कार्ड न होने से उपचार का खर्च वहन करना कठिन हो रहा है। परिजन अस्पताल में रक्त की व्यवस्था के लिए भी लोगों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में बच्चे का उपचार जारी है। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर सर्जरी और पर्याप्त रक्त उपलब्ध होने पर स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
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आवाज उठाते रहे ग्रामीण, खींच दी गई खुली हाईटेंशन लाइन
घनी आबादी और घर बने होने के बाद भी खुली हाईटेंशन लाइन खींच दी गई। बिजली विभाग के किसी अधिकारी ने देखा भी नहीं की गांव की क्या स्थिति है। महाराणा प्रताप जनजातीय संगठन के अध्यक्ष मदनलाल जायसवाल ने बताया कि 25 जनवरी से गांव में बिजली के खंभे और तार खींचने का काम शुरू हुआ। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विश्राम चौधरी के अनुसार, रिहायशी क्षेत्र से लाइन हटाने की मांग को लेकर पांच फरवरी को जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पर कोई कार्रवाई होती, इससे पहले ही लाइन खींच कर 11 फरवरी को बिजली आपूर्ति शुरू कर दी गई।
तुलसीपुर क्षेत्र के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने तो बताया कि अभी उन्हें कोई रिपोर्ट ही नहीं मिली है। उनका कहना है कि 11 हजार की लाइन के लिए केबिल लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है। इस तरह अब भी विभाग जिम्मेदारी से हाथ खींच रहा है।
सुरक्षा का करना चाहिए था इंतजाम
घरों के ऊपर से ही नहीं, पास भी हाईटेंशन लाइन खींचना नहीं चाहिए। यदि किसी वजह से लाइन खींची जा रही है तो केबिल लगाना जरूरी है। खुली लाइन की स्वीकृति की स्थिति में गार्डर या प्लास्टिक कवर लगाकर सुरक्षा के इंतजाम करने चाहिए थे। विद्युतीकरण कर आपूर्ति शुरू करने से पहले पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों को संरक्षा और सुरक्षा की जांच करनी चाहिए। इस तरह लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने की इजाजत किसी को नहीं है।
राम बहादुर, सेवानिवृत्त आईएएस
विद्युतीकरण की योजना पूर्व से स्वीकृत थी। तय मानक से ही कार्य हुआ है। मामले में अवर अभियंता से रिपोर्ट मांगी है। अभी रिपोर्ट मिली नहीं है। एसआईआर ड्यूटी में व्यस्त होने से गांव का निरीक्षण नहीं किया जा सका है।
राजेश कुमार, अधिशासी अभियंता