फोटो-31- बलरामपुर के बरईपुर गांव में सर्वे करने पहुंची आईआईटी कानपुर की टीम। स्रोत सूचना विभाग
बलरामपुर। आईआईटी कानपुर की टीम ने गांवों में जल जीवन मिशन की जमीनी स्थिति का अध्ययन किया। टीम ने केवल कागजी रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया, बल्कि घर-घर जाकर पानी की उपलब्धता, गुणवत्ता और लोगों के जीवन में आए बदलाव को करीब से देखा।
आईआईटी के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप स्वर्णकर के निर्देशन में चल रहे इस शोध अभियान के दूसरे दिन शोधार्थियों की अलग-अलग टीमें विकास खंड सदर और गैसड़ी के कई गांवों में पहुंची। टीमों ने बरईपुर, मनकी, चमरबोझिया और मझौवा गांव में अलग-अलग स्तर पर सर्वे, चौपाल और तकनीकी निरीक्षण किया। बरईपुर गांव में शोधार्थी प्रेम, विवेक और गोविंद ने घर-घर पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की। मनकी गांव में आकाश, जियाउल, संदीप, शुभम और दयानिधि की टीम ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई। बुजुर्गों ने बताया कि पहले दूषित पानी पीने से गांव में डायरिया, पेट दर्द और टाइफाइड जैसी बीमारियां आम थीं, लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है। चमरबोझिया गांव में अरविंद, अजय, सुमित और पंकज की टीम ने पानी के सैंपल लेकर उसकी गुणवत्ता की जांच की। वहीं मझौवा गांव में शैलेंद्र, प्रियांशु, गोविंद और रवींद्र ने जलापूर्ति प्रणाली, पाइपलाइन व्यवस्था और मोटर संचालन का तकनीकी ऑडिट किया। आईआईटी टीम का दावा है कि पड़ताल में सबसे बड़ा बदलाव महिलाओं के जीवन में दिखाई दिया। ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि पहले उन्हें तपती धूप, बारिश और ठंड में भी दूर-दराज हैंडपंपों और तालाबों तक जाना पड़ता था। अब घर में नल लगने से उनका समय बच रहा है और वे परिवार तथा बच्चों पर ज्यादा ध्यान दे पा रही हैं।
शोधार्थियों ने बताया कि वह अपनी विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कर जल्द ही शासन को सौंपेगी।