तुलसीपुर। बहुप्रतीक्षित देवीपाटन कॉरिडोर निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करने में प्रशासन जुटा हुआ है। नेपाल और मुंबई में रह रहे दो खातेदारों की प्रतीक्षा है। वहीं, बलरामपुर स्टेट की जमीन को अधिग्रहित करने के लिए अधिकारी वार्ता कर रहे हैं। स्टेट प्रबंधन से हरी झंडी मिलने के बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होगी।
तहसील प्रशासन के मुताबिक लगभग 50 एकड़ भूमि में बनने वाले इस कॉरिडोर के लिए 111 खातों में से 106 खातों का अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है। अब तक प्रभावित लोगों को 14 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया है। उप जिलाधिकारी राकेश कुमार जयंत ने बताया कि नेपाल व मुंबई में रह रहे शेष दो खाताधारकों की जानकारी जुटाई जा रही है। जल्द ही उनकी भूमि का भी अधिग्रहण कर लिया जाएगा। वहीं, बलरामपुर स्टेट की भूमि के संबंध में जिला अधिकारी स्तर पर वार्ता जारी है। सभी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद अधिग्रहित भूमि पर्यटन विभाग को हस्तांतरित कर दी जाएगी।
बदलेगा धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिदृश्य
देवीपाटन कॉरिडोर केवल एक निर्माण परियोजना नहीं बल्कि क्षेत्र के धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास का माध्यम बनेगा। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या से पूरे इलाके का सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य बदलने की संभावना है। कॉरिडोर के विकसित होने पर यहां श्रद्धालुओं के लिए भव्य प्रवेश द्वार, चौड़े मार्ग, पर्याप्त पार्किंग, प्रसाद गृह, विश्रामगृह, आधुनिक शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था और आकर्षक लाइटिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मंदिर परिसर को सुंदर उद्यानों और सांस्कृतिक प्रदर्शनियों से सजाया जाएगा।
हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार
व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार लाठ, स्वर्णकार सभा के अध्यक्ष विकास सोनी, नगर अध्यक्ष रामकुमार गुप्ता और व्यापारी श्याम बिहारी अग्रहरि ने कहा कि इस परियोजना से न केवल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी बल्कि क्षेत्र के व्यापार, होटल व्यवसाय और परिवहन सेवाओं को भी नई दिशा मिलेगी। कॉरिडोर निर्माण से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।