-उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ की तल्ख टिप्पणी -पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी की गिरफ्तारी पर रोक
-हाईकोर्ट ने तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के साथ मांगा शपथ पत्र
-सादुल्लानगर थाने की जमीन में मजार बनाकर कब्जा करने के मामले में नया मोड़
संवाद न्यूज एजेंसी
बलरामपुर। सादुल्लाहनगर थाने की जमीन कब्जा कर मजार बनाए जाने के मामले में बुधवार को नया मोड़ आ गया। पूर्व सपा विधायक आरिफ अनवर हाशमी की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक रोक लगाते हुए सवाल उठाया कि राजस्व रिकॉर्ड सरकारी अभिरक्षा में रहता है तो उसमें काेई विधायक कैसे हेराफेरी कर सकता है।
कोर्ट ने सवाल उठाया कि कोई व्यक्ति राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी बिना राजस्व अधिकारी से मिले कैसे कर सकता है? ऐसे में पूरे मामले में दो सप्ताह में काउंटर एफिडेविट दें। कोर्ट ने पूर्व विधायक को भी जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। 15 दिन बाद काउंटर एफिडेविट दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट मामले की अगली सुनवाई की तिथि तय करेगा।
वर्ष 2013 में आरिफ अनवर हाशमी विधायक थे और प्रशासन की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में वह आरोपी हैं। कार्रवाई को पूर्व विधायक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसपर चार अप्रैल को सुनवाई हुई।
पूर्व विधायक के भाई की हो चुकी है गिरफ्तारी
थाने की जमीन पर मजार बनाकर कब्जा करने और भाई मारुफ अनवर हाशमी को समिति बनाकर मुतव्वली बनाने के मामले में एक अप्रैल को एफआईआर दर्ज कराई गई। इसमें साल 2013 में हेराफेरी कर थाने की जमीन को खतौनी में समिति के नाम दर्ज कराने के लिए हेराफेरी का आरोप पूर्व विधायक पर लगे थे। स्थानीय लेखपाल सुनील कुमार ने एफआईआर में पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी, उनके भाई मारुफ अनवर हाशमी और समिति के सदस्यों के नाम दर्ज कराए थे। मारुफ की गिरफ्तार भी हो चुकी है।
आरोपों में घिरे तत्कालीन एसडीएम व तहसीलदार
कोर्ट की सख्ती के बाद खतौनी में हेराफेरी के समय उतरौला तहसील में तैनाती एसडीएम व तहसीलदार अब जांच के दायरे में आ गए हैं। मामले की जांच कर रहे अतिरिक्त एसडीएम संतोष ओझा ने बताया कि अभी किसी तरह के आदेश की जानकारी नहीं मिली है, जो भी निर्देश होगा उसके तहत कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि 2013 में एसडीएम राकेश कुमार सिंह व तहसीलदार प्रमोद कुमार राय यहां तैनात थे।
सादुल्लाहनगर प्रकरण में कार्रवाई की गई थी। उच्च न्यायालय के आदेश की जानकारी अभी नहीं मिली है। वहां से जो भी आदेश होगा, उसके तहत कार्रवाई की जाएगी। प्रदीप कुमार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व
। पूछा कि एफआईआर में खतौनी में नाम परिवर्तन करने वाले किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। साल 2013 की हेराफेरी के लिए सीधे तत्कालीन सपा विधायक को ही जिम्मेदार ठहराया गया, जबकि राजस्व नियमावली के तहत यह माना गया कि खतौनी में नाम का परिवर्तन राजस्व अधिकारी के ही स्तर से संभव है।