बलरामपुर। नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के करीब 800 संविदा कर्मियों की हड़ताल से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। एनएचएम के तहत तैनात चिकित्साधिकारी, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), सुपरवाइजर, लैब टेक्नीशियन और लिपिक सहित विभिन्न संवर्गों के कर्मचारी कार्य बहिष्कार कर रहे हैं। जिले के कई कर्मचारी कई दिनों से लखनऊ में आंदोलनरत हैं। इनके कार्य बहिष्कार से विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा है। इसका खामियाजा इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
बलरामपुर स्थित टीबी क्लीनिक के सुपरवाइजर और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के सीएचओ व एएनएम भी लखनऊ में आंदोलन में डटे हैं। बृहस्पतिवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महराजगंज तराई में सन्नाटा पसरा रहा। डॉक्टर और फार्मासिस्ट के मौजूद नहीं रहने से मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ा।
लोहेपनिया निवासी कृष्णावती ने बताया कि उन्हें सर्दी और बुखार है। वह सुबह 10 बजे से इंतजार कर रही हैं, लेकिन डॉक्टर और फार्मासिस्ट नहीं आए। रामगढ़ मैटहवा निवासी रितेश ने बताया कि उनके शरीर पर दाने निकल आए हैं और वायरल बुखार भी है। वह दवा लेने आए थे, लेकिन इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तुलसीपुर के अधीक्षक डॉ. सुजीत कुमार ने बताया कि चिकित्साधिकारी अवकाश पर हैं और कुछ कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। इसी तरह श्रीदत्तगंज और उतरौला स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में भी ताला लगा मिला। सीएचओ के गैरमौजूद रहने से मरीजों को परेशानी हो रही है।
एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अविनाश विक्रम सिंह ने बताया कि कर्मचारी 10 से 15 साल से विभाग में सक्रिय रूप से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन शासन स्तर पर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अन्य प्रदेशों में पांच साल तक काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी का दर्जा दिया जा चुका है।
आठवें वेतन आयोग का लाभ पाने के लिए खोला मोर्चा
एनएचएम के संविदा कर्मी नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों के अनुसार, हड़ताल का मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्राप्त करना है, ताकि उन्हें आठवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन वृद्धि का लाभ मिल सके।
एनएचएम के संविदा चिकित्साधिकारी डॉ. मोहसिन अली सिद्दीकी, संविदा एएनएम संघ की जिलाध्यक्ष आराधना सिंह, शशि जाटव और रंजू पाल ने बताया कि वे आठ से 10 साल से स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि पांच साल से अधिक सेवा देने वाले कर्मचारियों को नियमित करने का प्रावधान संविधान में निहित है, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है।
उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिलने पर उन्हें भी ग्रेड पे, आठवें वेतन आयोग के अनुरूप वेतन और विभिन्न सरकारी भत्तों का लाभ मिल सकेगा। अभी वे नियमित कर्मचारियों की तरह काम कर रहे हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें कुछ नहीं मिल रहा है। कर्मचारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
200 आरोग्य मंदिरों पर सेवाएं ठप
जिले में करीब 200 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। यहां तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) आंदोलन में शामिल हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के आरोग्य मंदिरों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को टीकाकरण व स्वास्थ्य परीक्षण के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।
फोटो-1- महराजगंज तराई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में खाली चिकित्सक की कुर्सी।
फोटो-1- महराजगंज तराई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में खाली चिकित्सक की कुर्सी।
फोटो-1- महराजगंज तराई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में खाली चिकित्सक की कुर्सी।
फोटो-1- महराजगंज तराई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में खाली चिकित्सक की कुर्सी।
फोटो-1- महराजगंज तराई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में खाली चिकित्सक की कुर्सी।