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Balrampur News: मंदिरों में चढ़े फूलों से तैयार हो रहा गुलाल

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बलरामपुर के सिरसिया में हर्बल अबीर-गुलाल बनाती महिलाएं।-संवाद
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बलरामपुर। इस बार होली में रसायनयुक्त अबीर-गुलाल के बजाय हर्बल गुलाल से लोग रंगों का पर्व मनाएंगे। इसके लिए विभिन्न ब्लॉक के स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मंदिरों से निकलने वाले फूलों, चुकंदर व आरारोट आदि से गुलाल व अबीर तैयार कर रही हैं। इस रंग से त्वचा पर दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। इससे बने गुलाल की खासी डिमांड भी जिले में है। बाजारों के अलावा 10 मार्च से ब्लॉकों एवं विकास भवन सभागार में स्टॉल लगाकर बिक्री की जाएगी।
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हर्बल रंग व गुलाल बनाने के लिए फूलों, पत्तियों, बीजों और सब्जियों का उपयोग किया जाता है। लाल रंग के लिए चुकंदर को उबालकर या सुखाकर पाउडर, गुड़हल के फूल को सुखाकर बारीक पीसकर तथा अनार के छिलकों को पानी में उबालकर लाल रंग प्राप्त किया जाता है। हल्दी, बेसन या आटे के साथ मिलाकर सूखा रंग तैयार होता है। गेंदे के फूल को सुखाने के बाद पीसकर या पानी में उबालकर घोल बनाया जाता है। पालक और मेथी की पत्तियों को पीसकर या सुखाकर पाउडर बनाया जाता है।


200 महिलाएं तैयार कर रहीं हर्बल गुलाल
एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक अखिलेश मौर्या ने बताया कि सदर विकास खंड के सिरसिया बहादुरापुर में लक्ष्मी समूह की रेखा 10 महिलाओं के साथ गुलाल तैयार कर रही हैं। गैसड़ी ब्लॉक की नंदनी समूह की 11 महिलाएं भी इस काम में लगी हैं। इसके अलावा उतरौला, रेहरा बाजार, गैड़ास बुजुर्ग, तुलसीपुर व शिवपुरा आदि ब्लॉक क्षेत्रों में करीब 200 महिलाएं हर्बल अबीर गुलाल बना रही हैं।
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महिलाओं को किया जा रहा प्रोत्साहित

स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए हर्बल गुलाल, पापड़ और चिप्स की बिक्री के लिए विकास भवन व ब्लॉक मुख्यालयों पर स्टाॅल लगेंगे, ताकि सभी विभागों के अधिकारी व कर्मचारी इन उत्पादों की खरीदारी करें। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। - मंजू त्रिवेदी, उपायुक्त एनआरएलएम
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