बलरामपुर। किसान जनार्दन सिंह की एफडी पर फर्जी तरीके से 20 लाख का लोन निकालने के मामले की जांच तेज हो गई है। प्रबंधक व सहायक प्रबंधक की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने पूछताछ का दायरा बढ़ा दिया है। रविवार को थाने में कई ऐसे लोगों को बुलाया गया, जिनकी भूमिका किसी न किसी रूप में बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़ी बताई जा रही है। दिनभर चली पूछताछ के बाद सभी को छोड़ दिया गया।
सूत्रों के अनुसार मामले में तत्कालीन कैशियर, एक सीएससी संचालक तथा दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को थाने बुलाया गया था। बताया जाता है कि इन सभी से बैंक में हुए लेन-देन, दस्तावेजों की प्रक्रिया, खातों के संचालन और अन्य गतिविधियों को लेकर विस्तार से जानकारी ली गई। पूछताछ कई घंटों तक चली। थाने के बाहर पूरे दिन लोगों की नजरें लगी रहीं। जो लोग पूछताछ के लिए अंदर गए, वह बाहर निकलने के बाद असहज और तनावग्रस्त दिखाई दिए।
उधर, जांच एजेंसियां बैंक में हुए वित्तीय लेन-देन की परतें खोलने में जुटी हैं। सूत्रों का कहना है कि जांच का फोकस केवल ऋण स्वीकृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि दस्तावेजी प्रक्रिया में किस-किस स्तर पर भूमिका निभाई गई और खातों से जुड़े तकनीकी बदलाव किन परिस्थितियों में किए गए। मुख्य आरोपी पूर्व शाखा प्रबंधक दिनेश पासवान की गिरफ्तारी के बाद जांच और तेज हो गई है। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका को भी खंगाल रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और लोगों से पूछताछ हो सकती है। प्रभारी निरीक्षक अविरल शुक्ल ने बताया कि मामले में विभिन्न लोगों से पूछताछ की गई है और जांच लगातार जारी है।