बलरामपुर। जिले के छोटे-मझोले 1400 उद्योगों में करीब पांच हजार श्रमिकों को रोजगार मिला है। लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों को काम मिलने से उनकी बेरोजगारी दूर हुई है। बाहर से कच्चे माल की आपूर्ति में दिक्कत होने से 400 छोटे मझोले उद्योगों में अभी भी ताला लटक रहा है। जिले के कारोबारियों ने शासन प्रशासन से कुटीर व लघु उद्योगों को संचालित कराने के लिए मदद की मांग की है।
उपायुक्त उद्योग हर्ष प्रताप सिंह शनिवार को बताया कि जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु व कुटीर उद्योगों की संख्या 1800 है। लॉकडाउन के चलते 1400 उद्योग भी चालू हालत में पाए गए है। कच्चे माल व अन्य समस्याओं के चलते करीब 400 सूक्ष्म, लघु व कुटीर उद्योगों का संचालन शुरू नहीं हो सका है। चालू हालत के सूक्ष्म, लघु व कुटीर उद्योगों में करीब 4600 श्रमिकों को रोजगार मिला है। बंद इकाइयों को शीघ्र भविष्य में संचालित कराने का प्रयास किया जा रहा है। जिला उद्योग केंद्र की तरफ से संचालित मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार योजना व ओडीओपी वित्तपोषण योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन प्राप्त किए जा रहे है।
बैंकों से समन्वय बनाकर अधिक से अधिक नए उद्योगों व बंद पड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे कि प्रवासी श्रमिक जो जनपद में आ रहे है उनको अधिक से अधिक रोजगार के अवसर मुहैया कराए जा सके। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत प्रवासी श्रमिकों के लिए विभिन्न ट्रेडों नाई, दर्जी, बढ़ई, हलवाई, राजमिस्त्री, मोची, कुम्हार, प्लम्बर आदि में प्रशिक्षण कराकर उन्हें टूल किट प्रदान किया जाएगा जिससे प्रवासी श्रमिक स्वरोजगारी बन सके।
ओडीओपी टूल किट प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रवासी श्रमिकों को दाल से संबंधित उत्पादों का प्रशिक्षण दिलाकर टूल उपलब्ध कराया जाएगा जिससे उन्हें रोजगार मिल सके। जिले में तीन चीनी मिलों का संचालन हो रहा है। पेराई सत्र पूरा होने के चलते चीनी मिलों में दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिकों को भी रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। जिले के आठ राईस व दाल मिलों में श्रमिक रोजगार के अवसर प्राप्त कर रहे है। छह फ्लोर मिल, पांच ऑयल मिल व चार रथ की फैक्टरियों में भी श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है।