बलरामपुर। शहर के व्यापारी हर साल बरसात में अपनी कमाई को पानी में बहते हुए देखते हैं, लेकिन जिम्मेदार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। गोंडा रोड, आंबेडकर तिराहा, नौशहरा मोहल्ला व मुख्य बाजार जैसे व्यापारिक क्षेत्रों में नालों की सफाई और जलनिकासी के कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। बारिश होते ही दुकानों में पानी घुस जाता है, लाखों का सामान खराब होता है और ग्राहकों की आवाजाही बंद हो जाती है।
कागजों में नगर पालिका की तैयारी
नगर पालिका तीन महीने के भीतर 72 नालों की सफाई कराने का दंभ भर रहा है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है। नालों की गाद जस की तस और सड़कें पानी से लबालब हैं। व्यापारियों ने कई बार ज्ञापन दिए, चेताया, सुझाव दिए, लेकिन नगर पालिका की नींद नहीं खुली। यही हाल उतरौला, तुलसीपुर, गैसड़ी व पचपेड़वा नगर निकायों में भी है। नालों की बेहतर सफाई न होने से व्यापारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
हम कमाने नहीं, नुकसान उठाने बैठते हैं
स्थानीय दुकानदार सोनू ने बताया कि नालों की सफाई केवल दिखावे के लिए होती है। सड़कें ऊंची कर दी गईं हैं, लेकिन दुकानें नीचे रह गईं है। अब हर बार बारिश में पानी सीधे दुकान में आता है। हार्डवेयर व्यापारी मुख्तार ने बताया कि बरसात होने पर पानी दुकान में घुसा रहता है, इससे व्यापार काफी प्रभावित होता है। सामान भी भीग कर खराब हो जाते हैं।
सुझाव के बाद कराई गई सफाई
नगर व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष संजय शर्मा का कहना है कि हमने पहले ही नगर पालिका को नालों की सफाई और जलनिकासी सुधारने की सलाह दी थी। एक बार सफाई करवाई गई। सड़क ऊंची होने के कारण बरसात का सारा पानी दुकान में घुस जाता है। जब तक स्थायी समाधान नहीं होगा, समस्या जस की तस बनी रहेगी।
भेजा गया है प्रस्ताव
गोंडा रोड एवं आंबेडकर तिराहे के पास नाले के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। इसी के साथ इंटरलॉकिंग भी कराया जाएगा। कुछ स्थानों पर अतिक्रमण होने के कारण नालों की सफाई में परेशानी होती है। इसका समाधान भी शीघ्र कराया जाएगा।
- धीरेंद्र प्रताप सिंह धीरू, नगर नालिका अध्यक्ष बलरामपुर