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Balrampur News: हर साल 385 गांवों पर टूटता है बाढ़ का कहर

Sun, 07 Jul 2024 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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बलरामपुर। राप्ती नदी में बाढ़ आने पर जिंदगी ठहर जाती है। भूख-प्यास चिंता में खत्म हो जाती है। बाढ़ के दौरान हर तरफ तबाही का मंजर रहता है। तीनों तहसीलों के 385 गांवों पर नदियों व पहाड़ी नालों के बाढ़ का कहर हर साल टूटता है। बाढ़ आने पर हर साल आठ लाख आबादी प्रभावित होती है। तहसील सदर में 126, तुलसीपुर में 110 व उतरौला में 152 गांवों में राप्ती, बूढी राप्ती नदी व पहाड़ी नालों में बाढ़ आने से भारी तबाही मचाती है।
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सदर तहसील के लालपुर-फगुइया निवासी श्यामलाल कहते हैं कि राप्ती नदी के बाढ़ का मंजर वर्ष 1969 से देख रहे हैं, उस बार की बाढ़ ने बहुत नुकसान किया था। भारी मात्रा में धन व जन हानि हुई थी। इसके बाद 1977 की बाढ़ ने भी भारी तबाही मचाई थी। वर्ष 2022 की बाढ़ भी विनाश लेकर आई। राप्ती नदी की धारा बदलती रहती है। कई बार कटान का दंश भी झेल चुके हैं। कल्याणपुर निवासी राम अचल का कहना है कि वर्ष 2019 की बाढ़ में उनका पूरा गांव ही राप्ती नदी की धारा बन गया था। 66 परिवारों का घर राप्ती की विनाश लीला में समाहित हो गया था। कल्याणपुर निवासी राम अभिलाख बताते हैं कि राप्ती की बाढ़ किसी आफत से कम नहीं रहती है। बाढ़ कम होने पर राप्ती नदी की कटान भी लोगों को तबाह करती है। लालपुर निवासी राम बरन का कहना है कि राप्ती नदी की बाढ़ व कटान की तबाही के चलते लोगों के जीवन स्तर में कभी सुधार नहीं आ सका है। (संवाद)

1.20 अरब मिले तो बाढ़ का हो स्थाई समाधान

-19 जून 2023 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समीक्षा बैठक में राप्ती नदी की बाढ़ से स्थाई समाधान के लिए एक अरब 20 करोड़ 60 लाख 78 हजार रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसमें पांच तटबंधों का निर्माण कराना था। राप्ती नदी के दायें तट पर 24 करोड़ 26 लाख 65 हजार रुपये में 34 किलोमीटर तक गैपों पर तटबंध का निर्माण, 24 करोड़ 81 लाख चार हजार रुपये में 19 किलोमीटर लंबाई में कटरा से लालपुर गांव तक तटबंध निर्माण, 24 करोड़ 57 लाख 39 हजार रुपये में 10 किलोमीटर लंबाई में किलौली से छीटनजोत गांव तक तटबंध निर्माण, 23 करोड़ 47 लाख 47 हजार रुपये में 10 किलोमीटर लंबाई में नंदौरी से भड़रिया गांव तक तटबंध निर्माण व 23 करोड़ 48 लाख 23 हजार रुपये में ग्राम कोड़री घाट से सिसई घाट तक तटबंध निर्माण के परियोजना का खाका तैयार कराया गया था।
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नुकसान पर मिलता है मुआवजा

-नदियों व पहाड़ी नालों के बाढ़ एवं कटान से होने वाले नुकसान का मुआवजा प्रभावितों को आपदा प्रबंधन से दिया जाता है। बाढ़ आने पर नुकसान का आकलन कराकर नुकसान की पूर्ति कराई जाती है।
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-प्रदीप कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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