बलरामपुर। राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आने के बाद भी तटवर्ती गांवों के लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। पानी घटते ही कई स्थानों पर नदी ने कटान तेज कर दिया है। खेतों की मिट्टी के साथ खड़ी धान और अन्य खरीफ फसलें नदी में समाने लगी हैं। जिले की तीन तहसीलों के 110 ग्राम पंचायतों को कटान की दृष्टि से संवेदनशील माना गया है।
बृहस्पतिवार को राप्ती का जलस्तर 104.220 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 104.620 मीटर से 40 सेंटीमीटर नीचे है। पिछले दो दिनों से जलस्तर लगातार घट रहा है। करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी कम हो रहा है। इसके साथ ही कई स्थानों पर नदी की धार किनारों को तेजी से काट रही है। शहर से सटे खमौहा गांव जाने वाले रास्ते पर भी पानी बह रहा है।
सदर तहसील के 59, तुलसीपुर के 21 और उतरौला के 30 गांव कटान की दृष्टि से संवेदनशील हैं। सदर के लालपुर फगुइया, चौका कला, जमालीजोत गंगाबक्श भागड़, टेंगनहिया मानकोट, सेमरहना, जबदही, कलंदरपुर, लालाजोत और बेला समेत कई गांवों में नदी खेतों की ओर बढ़ रही है। तुलसीपुर के महरी व मिश्रौलिया और उतरौला के मस्जिदिया, मलमलिया, चिचुड़ी सहंगिया, टेढ़वा तप्पाबांक, परसौना, नंदौरी, महुआधनी और मटियरिया करमा समेत कई गांवों में कटान का खतरा है।
ग्रामीण बलदेव, मनोज, सलमान और दीपक ने बताया कि पानी घटने के बाद कई जगह नदी की धार तेज हो गई है। खेतों का हिस्सा लगातार नदी में समा रहा है। तैयार धान और अन्य खरीफ फसलों को भी नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों ने कटान रोकने और फसल क्षति का सर्वे कराने की मांग की है। जिला कृषि अधिकारी उपेंद्र नाथ खरवार ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है।
बाढ़ प्रभावित गांवों में नाव बनी सहारा
राप्ती के साथ पहाड़ी नालों और जलभराव के कारण कई गांवों में आवागमन अभी सामान्य नहीं हुआ है। गौरा-तुलसीपुर राजमार्ग के दंतरंगवा डिप पर पानी भरने के बाद प्रशासन ने नाव उपलब्ध कराई है। खजुरिया, नेवरी, भूसैलवा कैलाशगढ़, चौखड़ा, थरूआ, थरूनिया, देवलहा और पुरैना समेत कई गांव पानी से घिरे हैं। ग्रामीण नाव से मुख्य सड़क तक पहुंचकर दवा, राशन और जरूरी सामान ला रहे हैं। एडीएम संदीप केला ने बताया कि राप्ती का जलस्तर घट रहा है। तटवर्ती क्षेत्रों में कटान की निगरानी की जा रही है।
डीएम ने नाव से आवागमन की व्यवस्था देखी
उतरौला। डीएम डॉ. विपिन कुमार जैन ने बृहस्पतिवार को पालापुर, मोहनजोत और मटियरिया करमा गांव पहुंचकर जलभराव, फसल क्षति और आवागमन की स्थिति देखी। उन्होंने नाव की उपलब्धता और संचालन का जायजा लिया। अधिकारियों को जरूरत वाले स्थानों पर नाव और अन्य संसाधन उपलब्ध रखने के निर्देश दिए। डीएम ने खेतों में पहुंचकर फसलों पर जलभराव के प्रभाव को भी देखा। राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों को नुकसान का नियमानुसार आकलन कराने के निर्देश दिए।
राप्ती की बाढ़
राप्ती की बाढ़